Rahul karta tha apni behan ko tang bhai behani ki kahani

Rahul karta tha apni behan ko tang bhai behani ki kahani
Share this Post

शाम को आने दो पापा को, तुम्हारी और पिटाई होगी । ‘ राहुल की मां सुनीता ने कहा ।

राहुल एक कोने में सहमा सा खड़ा हुआ था । मां ने उसकी पिटाई की थी क्योंकि आज फिर उसने अपनी छ. महीने की बहन रुचि को मारा था ।

‘न जाने क्या हो गया है इस लड़के को’ सुनीता क्रोध में थी ।

जब देखो छोटी बहन पर हाथ चलाता है। ‘

नन्हीं रुचि के गाल पर अंगुलियों की छाप थी । मां ने राहुल की आवाज नहीं सुनी तो उसका गुस्सा उसने नन्हीं रुचि पर निकाला था । कभी- कभी सुनीता परेशान हो जाती दोनों को संभालते हुए । रूचि के आ जाने से राहुल में अचानक परिवर्तन आ गया था 1

उसे लगने लगा कि रुचि के रूप में उसका प्रतिद्वन्दी घर में आ गया है । बात-बात पर वह घर की चीजें तोड़ता नहीं तो रुचि को तंग करता । कभी उसके चिकोटी काट कर उसको रुला देता तो ? उसकी बोतल की निपल काट देता। हर तरह से सुनीता का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट करने की कोशिश करता ।

Rahul karta tha apni behan ko tang bhai behani ki kahani

Rahul karta tha apni behan ko tang bhai behani ki kahani

शाम को पापा जब घर पर आए तो की शिकायत हुई । समस्या गंभीर । राहुल कहने को छोटा नहीं था । पूरे आठ वर्ष का हो गया था ।

‘राहुल इधर आओ’ राहुल के पिता बुलाया ।

‘तुमने बहन को क्यों मारा? ‘

राहुल सिर झुकाए खड़ा रहा । एक व थप्पड़ राहुल के गाल पर पड़ा । सुबक पड़ा । मुझ से कोई प्यार नहीं । आप दोनों बस रुचि को ही प्यार करते हैं । मैं यहां नहीं रहूंगा । मैं घर छोड़ कर चला जाऊंगा’ राहुल रोते हुए अपने कमरे में चला गया ।

राहुल के माता- पिता अवाक थे । बात इतनी गंभीर हो जाएगी ऐसा उन्होंने सोचा भी नहीं था। यदि समय रहते इस समस्या का हल नहीं निकाला गया तो राहुल विद्रोही हो जाएगा । यह बात राहुल के माता- पिता को परेशान किए हुए थी ।

क्यो न मांजी को बुलवा लें । हो सकता है उनके समझाने से राहुल में परिवर्तन आ नए । वह उनकी हर बात मानता है। सुनीता ने सलाह दी ।

यही ठीक रहेगा, मैं मां को चिट्ठी लिख कर कुछ दिनों के लिए बुलवा लेता हूं । ‘ राहुल के पिता ने भारी स्वर में कहा ।

दादी को अचानक आया देख कर राहुल खिल उठ ।

‘ दादी आ गई दादी आ गई ‘ राहुल चहक उठा।

‘दादी लाओ, अपना सामान दो । ‘

अरे, बस- बस, सामान गिर जाएगा । ‘ दादी बोल उठी ।

राहुल के माता- पिता ने मांजी के चरण छुए । राहुल दौड कर दादी के लिए पानी ले आया । राहुल को चहकता देख उसके माता- पिता हैरान थे । इतने दिनों में राहुल कितना बदल गया था । हंसता- खेलता राहुल गुमसुम रहने लगा था । राहुल के पिता ने सारी स्थिति अपनी मां को लिख भेजी थी, इसलिए वह राहुल की मन स्थिति से अवगत थी ।

दादी के आते ही राहुल खुश हो गया । सारा दिन वह उनके आगे- पीछे ही घूमता रहता । दादी ने आते ही नन्हीं रुचि के सारे काम अपने हाथ में ले लिए । सुनीता ने थोडी राहत की सांस ली । दादी नन्हीं रुचि की मालिश कर रही थीं ।

‘ क्या दादी, आप भी इस रोंदू के काम करने लग गई ‘ राहुल ने लाड़ से दादी के गले में बाहें डाल दीं ।

‘ मेरे साथ खेलो न’

अरे इसकी मालिश होगी तभी तो यह तंदुरुस्त बनेगी और फिर तुम्हारे साथ खेलेगी, ‘ दादी ने समझाया ।

नन्हीं रुचि ने राहुल को देख कर किलकारी मारी, मानो वह भी दादी की बात का समर्थन कर रही हो । आज न जाने कैसे राहुल को अपनी बहन पर प्यार आ गया ।

– गोद में लोगे, राहुल बहन को, ‘ दादी -ने पूछा।

डरते- डरते रुचि को अपनी गोद में उठाया । नन्हीं रुचि उसकी कमीज से खेलने लगी । उसके नन्हें हाथों के कोमल – स्पर्श, प्यारी सी मुस्कान से राहुल रोमांचित हो उठा । पूछ बैठा, – दादी, यह तो हर वक्त लेटी रहती है – मां भी बस इसी का ही काम करती है। ‘

‘बेटे, बच्चे जब छोटे होते है तो उन्हें देखभाल की ज्यादा जरूरत होती है जब तुम छोटे थे तब तुम भी ऐसे ही थे ।

‘ सच, दादी’ ।

और क्या’ ।

राहुल अपने विषय में जानने के लिए और उत्सुक हो उठा । रुचि की गतिविधियों में उसे अपने बचपन की झलक दिखाई देती ।

धीरे- धीरे नन्हीं रुचि के कामों में राहुल दादी की मदद करने लगा । कभी दौड़ कर बोतल ले आता तो कभी उसके कपड़े बदलवाने में दादी की सहायता करता ।

अब रुचि से खेलने में उसे मजा आने लगा । रुचि भी किलकारी मार कर राहुल को बुलाती । जिस दिन रुचि ने पहला शब्द ‘ दादा ‘ कहा तो राहुल खुशी से नाच उठा । पूरे घर में रुचि को उठाए घूमता रहा ।

उसके माता- पिता भी उसमें आए परिवर्तन को देख कर खुश थे । राहुल ने रुचि की उपस्थिति को स्वीकार कर लिया था, यह सबके लिए संतोष का विषय था ।

अब दादी के जाने का समय भी आ गया । उनके जाने की खबर सुन कर राहुल उदास हो गया ।

‘ मैं आपसे मिलने छुट्टियों में जरूर आऊंगा ‘ राहुल ने उदास स्वर में कहा । ‘ बहन को तंग तो नहीं करोगे’ दादी ने पूछा ।

‘ नहीं, यह तो मेरी सबसे प्यारी बहन है, ‘कहकर राहुल ने रुचि का माथा चूम लिया ।

राहुल के पिता रिक्शा ले आए थे । वह और दादी रिक्शे में बैठ कर स्टेशन की ओर चल पड़। जब तक रिक्शा आंख से ओझल नहीं हो गया तब तक राहुल और सुनीता हाथ हिलाते रहे । फिर सुनीता, राहुल और रुचि अंदर आ गए ।

नन्ही रुचि किलक उठी

‘ दा द दा ‘

राहुल ने रुचि को चूम लिया । स्नेह की डोर जो अब तक कमजोर थी मजबूत हो चली थी ।

भूत प्रेत को देखकर अच्छेअच्छे के पसीने छूट जाते हैं परंतु अफसाना ने अपनी हिम्मत के बदौलत अपनी जान बचा ली यह अपने आप में एक बहुत बड़ी बात है।।।।

कहानी “Rahul karta tha apni behan ko tang bhai behani ki kahani” पसंद आयी तो हमारे फेसबुक और टवीटर पेज को लाइक और शेयर जरूर करें ?


? Facebook.com/cbrmixglobal

? Twitter.com/cbrmixglobal

More from Cbrmix.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *