100+ Rahat Indori best shayari Collection

100+ Rahat Indori shayari and Ghazal Collection

Contents: Rahat Indori best shayari Collection, Rahat Indori shayari, Rahat indori two line shayari, rahat indori best shayri, राहत इंदौरी बेस्ट शायरी इन हिंदी, राहत इंदौरी की मशहूर शायरी, Rahat Indori shayri in hindi rahat indori romantic shayari in hindi, love shayari rahat indori, rahat indori sad shayri, rahat indori ghazals, rahat indori ghazal in hindi, rahat indori ki shayari, rahat indori shayari on love, rahat indori romantic ghazal in hindi, best shayari of rahat indori in hindi 

100+ Rahat Indori shayari and Ghazal Collection part 2

 

अभी गनीमत है सब्र मेरा, अभी लबालब भरा नहीं हूं


अभी गनीमत है सब्र मेरा, अभी लबालब भरा नहीं हूं

वो मुझको मुर्दा समझ रहा है, उसे कहो मैं मरा नहीं हूं.

वो कह रहा है कि कुछ दिनों में मिटा के रख दूंगा नस्ल तेरी

है उसकी आदत डरा रहा है, है मेरी फितरत डरा नहीं हूं

 

साँसों की सीडियों से उतर आई जिंदगी


साँसों की सीडियों से उतर आई rahat indori shayari

साँसों की सीडियों से उतर आई जिंदगी

बुझते हुए दिए की तरह, जल रहे हैं हम

उम्रों की धुप, जिस्म का दरिया सुखा गयी
हैं हम भी आफताब, मगर ढल रहे हैं हम

Saanson ki seediyon se utar aayi jindgee
Bhujte hue diye ki tarah jal rahe hain hum

Umron ki dhuo, jisam ka dariya shukh gayi
Hain hum bhi aaftaab, magar dhal rahe hain hum

सारी बस्ती क़दमों में है


sari basti kadmon me hai rahat indori shayari
सारी बस्ती क़दमों में है, ये भी इक फ़नकारी है
वरना बदन को छोड़ के अपना जो कुछ है सरकारी है
कालेज के सब लड़के चुप हैं काग़ज़ की इक नाव लिये
चारों तरफ़ दरिया की सूरत फैली हुई बेकारी है
फूलों की ख़ुश्बू लूटी है, तितली के पर नोचे हैं
ये रहजन का काम नहीं है, रहबर की मक़्क़ारीहै
हमने दो सौ साल से घर में तोते पाल के रखे है
मीर तक़ी के शेर सुनाना कौन बड़ी फ़नकारी है
अब फिरते हैं हम रिश्तों के रंग-बिरंगे ज़ख्म लिये
सबसे हँस कर मिलना-जुलना बहुत बड़ी बीमारी है
दौलत बाज़ू हिकमत गेसू शोहरत माथा गीबत होंठ
इस औरत से बच कर रहना, ये औरत बाज़ारी है
कश्ती पर आँच आ जाये तो हाथ कलम करवा देना
लाओ मुझे पतवारें दे दो, मेरी ज़िम्मेदारी है…
ज़रूर वो मेरे बारे में राय दे
—————-
jarur wo mere bare me raye de rahat indori shayari
ज़रूर वो मेरे बारे में राय दे लेकिन
ये पूछ लेना कभी मुझसे वो मिला भी है
charaghon ka ganara chal

charaghon ka ganara chal raha hai rahat indori shayari

charaghon ka ganara chal raha hai
hawaon se dostana chal raha hai
jawani ki hawaen chal rahi hai
meri gum gastagi pe hasne walo
mere piche zaman chal raha hai

 

Raste mein fir wahi pairon ka


Raste mein fir wahi pairon ka chakkar aa gaya

January guzra nahi tha aur December aa gaya

Ye sharaarat hai, siyaasat hai, ke hai saazish koi
Shaakh par fal aayein isse pehle pathhar aa gaya

Maine kuch pani bacha rakha tha apni aankh mein
Ek samandar apne sukhe honth lekar aa gaya

Apne darwaaze pe maine pehle khud aawaaz di
Aur phir kuch der mein khud hi nikal kar aa gaya

घर से ये सोच के निकला हूं कि


ghar se ye soch kar nikla hoon rahat indori shayari

घर से ये सोच के निकला हूं कि मर जाना है
अब कोई राह दिखा दे कि किधर जाना है

जिस्म से साथ निभाने की मत उम्मीद रखो
इस मुसाफ़िर को तो रस्ते में ठहर जाना है

मौत लम्हे की सदा ज़िंदगी उम्रों की पुकार
मैं यही सोच के ज़िंदा हूं कि मर जाना है

नशा ऐसा था कि मयख़ाने को दुनिया समझा
होश आया तो ख्या‍ल आया कि घर जाना है

मिरे जज़्बे की बड़ी क़द्र है लोगों में मगर
मेरे जज़्बे को मिरे साथ ही मर जाना है

 

मेरी ख्वाहिश है कि


मेरी ख्वाहिश है कि आंगन में न दीवार उठे rahat indori best shayari

मेरी ख्वाहिश है कि आंगन में न दीवार उठे
मेरे भाई, मेरे हिस्से की जमीं तू रख ले
कभी दिमाग, कभी दिल, कभी नजर में रहो
ये सब तुम्हारे घर हैं, किसी भी घर में रहो

 

आंख में पानी रखो होंटों पे चिंगारी रखो


ankhon me paani rakho hoton pe rahat indori shayari

आंख में पानी रखो होंटों पे चिंगारी रखो
ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो

राह के पत्थर से बढ़ कर कुछ नहीं हैं मंज़िलें
रास्ते आवाज़ देते हैं सफ़र जारी रखो

एक ही नद्दी के हैं ये दो किनारे दोस्तो
दोस्ताना ज़िंदगी से मौत से यारी रखो

आते जाते पल ये कहते हैं हमारे कान में
कूच का ऐलान होने को है तय्यारी रखो

ये ज़रूरी है कि आंखों का भरम क़ाएम रहे
नींद रखो या न रखो ख़्वाब मेयारी रखो

ये हवाएं उड़ न जाएं ले के काग़ज़ का बदन
दोस्तो मुझ पर कोई पत्थर ज़रा भारी रखो

ले तो आए शाइरी बाज़ार में ‘राहत’ मियां
क्या ज़रूरी है कि लहजे को भी बाज़ारी रखो

 

Suraj Sitare Chand Mire Saat Men Rahe


Suraj Sitare Chand Mire Saat Men Rahe rahat indori best shayari

Suraj Sitare Chand Mire Saat Men Rahe
Jab Tak Tumhare Haat Mire Haat Men Rahe

सूरज सितारे चाँद मिरे सात में रहे
जब तक तुम्हारे हात मिरे हात में रहे.

~ Rahat Indori

ab mein na hun na baaki hai zamane mere


ab main na hu na baaki hai rahat indori shayari

ab mein na hun na baaki hai zamane mere
phir bhi mash hur hai shayairon mein fasane mere
zindagi hai to naya zakham bhi jayega
abhi aur baaki hai kahi dost purane mere

haath khali hai tere shehar jate jate
jaan hoti meri jaan lutate jate jate
ab to har patthar mujhe janta hai
ke umar gujardi hai tere shahar mein aate jate

मज़ा चखा के ही माना हूँ


maza chakha ke hi mana hu rahat indori two line shayari

मज़ा चखा के ही माना हूँ मैं भी दुनिया को
समझ रही थी कि ऐसे ही छोड़ दूँगा उसे

Maza Chakha Ke Hi Maana Huun Main Bhi Duniya Ko
Samajh Rahi Thi Ki Aise Hi Chhoḍ Dunga Use

Ab Na Main Hun, Na Baaki Hai


ab na main hun na baaki hai zamane rahat indori two line shayari

Ab Na Main Hun, Na Baaki Hai Zamane Mere,
Fir Bhi MashHoor Hain Shaharon Mein Fasane Mere,
Zindagi Hai Toh Naye Zakhm Bhi Lag Jayenge,
Ab Bhi Baaki Hain Kayi Dost Puraane Mere.
अब ना मैं हूँ, ना बाकी हैं ज़माने मेरे​,
फिर भी मशहूर हैं शहरों में फ़साने मेरे​,
ज़िन्दगी है तो नए ज़ख्म भी लग जाएंगे​,
अब भी बाकी हैं कई दोस्त पुराने मेरे।

मुझसे पहले वो किसी और की थी


mujhse pehle wo kisi aur ki thi rahat indori shayari
मुझसे पहले वो किसी और की थी, मगर कुछ शायराना चाहिए था
चलो माना ये छोटी बात है, पर तुम्हें सब कुछ बताना चाहिए था
कभी दिमाग़ कभी दिल कभी

kabhi dimag kabhi dil rahat indori shayari

कभी दिमाग़ कभी दिल कभी नज़र में रहो,
ये सब तुम्हारे ही घर हैं, किसी भी घर में रहो…

Teri Har Baat Mohabbat Mein


teri har baat mohobaat me gawarra kar ke rahat indori shayari

Teri Har Baat Mohabbat Mein Ganwara Karke,
Dil Ke Bajaar Mein Baithe Hain Khasaara Karke,
Main Woh Dariya Hun Ke Har Boond Bhanwar Hai Jiski,
Tumne Achha Hi Kiya Hai Mujhse Kinaara Karke.
​तेरी हर बात ​मोहब्बत में गँवारा करके​,
​दिल के बाज़ार में बैठे हैं खसारा करके​,
​मैं वो दरिया हूँ कि हर बूंद भंवर है जिसकी​,​​
​तुमने अच्छा ही किया मुझसे किनारा करके।

बुतों से मुझको इजाज़त अगर कभी


butto se mujhko ijjajat agar rahat indori shayari

बुतों से मुझको इजाज़त अगर कभी मिल जाए
तो शहर भर के खुदाओं को बेनक़ाब करूँ..

उस आदमी को बस एक धुन सवार रहती है,
बहुत हसीन है दुनिया इसे खराब करूँ..

मैं करवटों के नए ज़ाविये लिखूं शब भर,
ये इश्क़ है….. तो कहाँ ज़िन्दगी अज़ाब करूँ..

– राहत इंदौरी

बन के इक हादसा बाज़ार में


ban ke ik hadsa bazaar me aa jayega rahat indori shayari

बन के इक हादसा बाज़ार में आ जाएगा
जो नहीं होगा वो अखबार में आ जाएगा

चोर उचक्कों की करो कद्र, की मालूम नहीं
कौन, कब, कौन सी सरकार में आ जाएगा

Ban ke ik hadasa bazaar me aa jayega
Jo nahi hoga wo akhbaar me aa jayega

Chor uchkkon ki karo kadr, ki maloom nahi
Kaun, kab, kon si sarkaar me aa jayega

नए किरदार आते जा रहे हैं


naye kirdar aate ja rahe hain rahat indori shayari

नए किरदार आते जा रहे हैं
मगर नाटक पुराना चल रहा है

कट चुकी है उम्र सारी जिनकी पत्थर


kat chuki hai umra sari jinki rahat indori shayari

कट चुकी है उम्र सारी जिनकी पत्थर तोड़ते,
अब तो उन हाथों में कोहिनूर होना चाहिए

फैसला जो कुछ भी हो


faisla jo kuch bhi ho hume manzoor hona chahiye rahat indori shayari

फैसला जो कुछ भी हो, हमें मंजूर होना चाहिए
जंग हो या इश्क हो, भरपूर होना चाहिए

भूलना भी हैं, जरुरी याद रखने के लिए
पास रहना है, तो थोडा दूर होना चाहिए

Faisla jo kuch bhi ho, hume manjoor hona chahiye
Jung ho ya ishq ho, Bharpur hona chahiye

Bhoolna bhi hai, jaroori yaad rakhne ke liye
Paas rahna hai, to thoda door hona chahiye

अपने होने का हम इस तरह


apne hone ka pata hum is tara dete the rahat indori shayari

अपने होने का हम इस तरह पता देते थे
ख़ाक मुट्ठी में उठाते थे उड़ा देते थे

बेसमर जान के हम काट चुके हैं जिनको
याद आते हैं के बेचारे हवा देते थे

उसकी महफ़िल में वही सच था वो जो कुछ भी कहे
हम भी गूंगों की तरह हाथ उठा देते थे

अब मेरे हाल पे शर्मिंदा हुये हैं वो बुज़ुर्ग
जो मुझे फूलने-फलने की दुआ देते थे

अब से पहले के जो क़ातिल थे बहुत अच्छे थे
कत्ल से पहले वो पानी तो पिला देते थे

वो हमें कोसता रहता था जमाने भर में
और हम अपना कोई शेर सुना देते थे

घर की तामीर में हम बरसों रहे हैं पागल
रोज दीवार उठाते थे, गिरा देते थे

हम भी अब झूठ की पेशानी को बोसा देंगे
तुम भी सच बोलने वालों के सज़ा देते थे

Chehron Ke Liye Aayine Kurbaan


chehron ke liye aayna kurban kiye jate hain rahat indori shayari

Chehron Ke Liye Aayine Kurbaan Kiye Hain,
Iss Shauk Mein Apne Bade Nuksaan Kiye Hain,
Mehfil Mein Mujhe Gaaliyan Dekar Hai Bahut Khush,
Jis Shakhs Par Maine Bade Ehsaan Kiye Hain.
चेहरों के लिए आईने कुर्बान किये हैं,
इस शौक में अपने बड़े नुकसान किये हैं,​
महफ़िल में मुझे गालियाँ देकर है बहुत खुश​,
जिस शख्स पर मैंने बड़े एहसान किये है।

इश्क में पीट के आने के लिए काफी


ishq me peet ke aane ke liye kaafi hu rahat indori shayari

इश्क में पीट के आने के लिए काफी हूँ
मैं निहत्था ही ज़माने के लिए काफी हूँ

हर हकीकत को मेरी, खाक समझने वाले
मैं तेरी नींद उड़ाने के लिए काफी हूँ

एक अख़बार हूँ, औकात ही क्या मेरी
मगर शहर में आग लगाने के लिए काफी हूँ

Ishq me peet ke aane ke liye kafi hoon
Main nihattha hi zamane ke liye kaafi hoon

Har hakikat ko meri, khaak samjhne wale
Main teri neend udaane ke liye kaafi hoon

Ek akhbaar hoon, aukaat hi kya meri
Magar shahar me aag lagaane ke liye kaafi hoon

जुबा तो खोल, नज़र तो मिला


juban to khol nazar to mila rahat indori shayari

जुबा तो खोल, नज़र तो मिला,जवाब तो दे
में कितनी बार लुटा हु, मुझे हिसाब तो दे

तेरे बदन की लिखावट में हैं उतार चढाव
में तुझको कैसे पढूंगा, मुझे किताब तो दे

Juba to khol, nazar to mila, jawaab to de
Mein kitni baar luta hun, mujhe to hisaab to de

Tere badan ki likhawat mein hain utaar chadhav
Mein tujhko kaise padhunga, mujhe kitaab to de

मैं अपना अज़्म लेके मंज़िलों


main apna azam leke rahat indori shayari

मैं अपना अज़्म लेके मंज़िलों की सिम्त निकला था,
मशक्क़त हाथ पे रक्खी थी, किस्मत घर पे रक्खी थी….

– राहत इंदौरी

नर्म सोफों पे कहीं कुंडली


narm sofon me kahin rahat indori shayari

नर्म सोफों पे कहीं कुंडली मारे होंगे
आजकल साँप पिटारे में नहीं रहते हैं

चराग़ों को उछाला जा रहा है


charagon ko uchala ja raha hai rahat indori shayari

चराग़ों को उछाला जा रहा है
हवा पर रौब डाला जा रहा है…

न हार अपनी न अपनी जीत होगी
मगर सिक्का उछाला जा रहा है

वो देखो मयकदे के रास्ते में
कोई अल्लाह वाला जा रहा है

थे पहले ही कई सांप आस्तीं में
अब इक बिच्छू भी पाला जा रहा है

मिरे झूठे गिलासों की छका कर
बहकतों को संभाला जा रहा है

हमी बुनियाद का पत्थर हैं लेकिन
हमें घर से निकाला जा रहा है

जनाज़े पर मिरे लिख देना यारो
मोहब्बत करने वाला जा रहा है

Sakht raaho me bhi aasaan safar


shakt raahon me bhi safar aasan lagta hai rahat indori shayari

Sakht raaho me bhi aasaan safar lagta hai
Ye meri Maa ki duaao.n ka asar lagta hai

 

पेशानियों पे लिखे मुक़द्दर


peeshannion me likhe mukaddar nahi mile rahat indori shayari

पेशानियों पे लिखे मुक़द्दर नहीं मिले
दस्तार कहां मिलेंगे जहां सर नहीं मिले

आवारगी को डूबते सूरज से रब्त है,
मग़्रिब के बाद हम भी तो घर पर नहीं मिले

कल आईनों का जश्न हुआ था तमाम रात,
अन्धे तमाशबीनों को पत्थर नहीं मिले

मैं चाहता था ख़ुद से मुलाक़ात हो मगर,
आईने मेरे क़द के बराबर नहीं मिले

परदेस जा रहे हो तो सब देखते चलो,
मुमकिन है वापस आओ तो ये घर नहीं मिले

 

Ab hum makaan ke tala lagaane


ab hum makaan mein taala lagane wale hain rahat indori shayari

Ab hum makaan ke tala lagaane wale hain
Pata chala hain ki mehaman aane wale hain

 

दरमियाँ एक ज़माना रखा जाए


darmiyaan ke zamana rakha jaye rahat indori shayari

दरमियाँ एक ज़माना रखा जाए
तब कोई पल सुहाना रखा जाए

सर पे सूरज सवार रहता है
पीठ पर शामियाना रखा जाए

 

चलते फिरते हुए मेहताब दिखाएँगे तुम्हे


chalte phirte hue mohobaat dikayenge tumhe rahat indori shayari

चलते फिरते हुए मेहताब दिखाएँगे तुम्हे
हमसे मिलना कभी पंजाब दिखाएँगे तुम्हे

Chalte phirte hue MEhtaab dikhayenge tumhe
Humse milna kabhi Punjab dikhayenge tumhe

rahat indori

rahat indori shayari

rahat indori ghazal

rahat indori two line shayri

rahat indori best shayri

 

ये आने वाले ज़मानों के काम


ये आने वाले ज़मानों के काम आएँगे
कहीं छिपा के मेरे तजुर्बात रख देना

 

बीमार को मरज़ की दवा देनी चाहिए


बीमार को मरज़ की दवा देनी चाहिए
मैं पीना चाहता हूँ पिला देनी चाहिए
अल्लाह बरकतों से नवाज़ेगा इश्क़ में
है जितनी पूँजी पास लगा देनी चाहिए
दिल भी किसी फ़क़ीर के हुजरे से कम नहीं
दुनिया यहीं पे ला के छुपा देनी चाहिए
मैं ख़ुद भी करना चाहता हूँ अपना सामना
तुझ को भी अब नक़ाब उठा देनी चाहिए
मैं फूल हूँ तो फूल को गुल-दान हो नसीब
मैं आग हूँ तो आग बुझा देनी चाहिए
मैं ताज हूँ तो ताज को सर पर सजाएँ लोग
मैं ख़ाक हूँ तो ख़ाक उड़ा देनी चाहिए
मैं जब्र हूँ तो जब्र की ताईद बंद हो
मैं सब्र हूँ तो मुझ को दुआ देनी चाहिए
मैं ख़्वाब हूँ तो ख़्वाब से चौंकाइए मुझे
मैं नींद हूँ तो नींद उड़ा देनी चाहिए
सच बात कौन है जो सर-ए-आम कह सके
मैं कह रहा हूँ मुझ को सज़ा देनी चाहिए

 

इश्क ने गूथें थे जो गजरे नुकीले हो गए


इश्क ने गूथें थे जो गजरे नुकीले हो गए
तेरे हाथों में तो ये कंगन भी ढीले हो गए

फूल बेचारे अकेले रह गए है शाख पर
गाँव की सब तितलियों के हाथ पीले हो गए

Ishq ne goothe the jo gajre nukile ho gaye
Tere haathon me to ye kangan bhi dheele ho gaye

Phool bechare akele rah gaye hain shaakh par
Gaonv ki sab titaliyon ke haath peele ho gaye

 

Main wo dariya hoon ki har boond


Main wo dariya hoon ki har boond bhanawar hai jiski,

Tumne acha hi kiya mujhse kinaara karke.”

“Ek na ek roz dhoond hi lunga tujhko,

Thokrein Zehar nahin hain ki kha bhi na sakun.”

“Aao Shehar mein naye dost banaayein Raahat,

Aastinon mein chalo saanp hi paale jaayein.”

 

लोग हर मोड़ पे रुक रुक के संभलते


लोग हर मोड़ पे रुक रुक के संभलते क्यों हैं
इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यों हैं

मोड़ होता हैं जवानी का संभलने के लिए
और सब लोग यही आके फिसलते क्यों हैं

Log har mod pe ruk ruk ke sambhalte kyo hain
Itna darte hain to ghar se nikalte kyo hain

Mod hota hain jawani ka sambhalne ke liye
Aur sab log yahi aake fisalte kyo hain

 

जा के कोई कह दे, शोलों से चिंगारी से


जा के कोई कह दे, शोलों से चिंगारी से
फूल इस बार खिले हैं बड़ी तैयारी से

बादशाहों से भी फेके हुए सिक्के ना लिए
हमने खैरात भी मांगी है तो खुद्दारी से

Jaa ke koi kah de, sholon se chingaari se
Phool is bar khile hain badi taeyari se

Baadshaahon se bhi feke hue sikke na liye
Humne khaeraat bhi maangi hain to khuddari se

 

har mod pe sambhal ke chalte hai


har mod pe sambhal ke chalte hai log,
itna darte hai to ghar se kyun nikalte hai log

 

Bahut ghuroor hai dariya ko


Bahut ghuroor hai dariya ko apne hone par
Jo meri pyaas se buljhe to dhajjiyan uD jaayein

 

दोस्ती जब किसी से की जाये


दोस्ती जब किसी से की जाये
दुश्मनों की भी राय ली जाए

बोतलें खोल के तो पि बरसों
आज दिल खोल के पि जाए

Dosti jab kisi se ki jaaye
Dushmano ki bhi raay lee jaaye

Botlen khol ke to pi barson
Aaj dil khol ke pi jaaye

 

वो चाहता था कि कासा ख़रीद ले मेरा


वो चाहता था कि कासा ख़रीद ले मेरा
मैं उस के ताज की क़ीमत लगा के लौट आया

 

Uski yaad aayi hai saanso zara aahista


Uski yaad aayi hai saanso zara aahista chalo
Dhadkano se bhi ibaadat mein khalal padta hai

 

मौसमो का ख़याल रखा करो


मौसमो का ख़याल रखा करो
कुछ लहू मैं उबाल रखा करो

लाख सूरज से दोस्ताना हो
चंद जुगनू भी पाल रखा करो

Mausamo ka khyaal rakah karo
Kuchh lahoo mein ubaal rakha karo

Laakh sooraj se dostaana hi
Chand jugnoo bhi paal rakha karo

 

Na hamsafar na kisi ham-nashin se niklega


Na hamsafar na kisi ham-nashin se niklega
Hamare paanv ka kaanta hamin se nikle ga

 

राज़ जो कुछ हो इशारों में बता देना


राज़ जो कुछ हो इशारों में बता देना
हाथ जब उससे मिलाओ दबा भी देना

नशा वेसे तो बुरी शे है, मगर
“राहत” से सुननी हो तो थोड़ी सी पिला भी देना

Raaz jo kuch ho ishaaron me bata bhi dena
Haath jab usse milaao dabaa bhi dena

Nashaa vese to buri she hian, magar
“Rahat” se sunni ho to thodi si pilaa bhi dena

 

Maine apni khushk aankhon se lahoo chhal kaa diyaa


Maine apni khushk aankhon se lahoo chhal kaa diyaa
Ik samundar kah raha tha mujhko paani chahiye

 

हर एक हर्फ़ का अंदाज़ बदल रखा हैं


हर एक हर्फ़ का अंदाज़ बदल रखा हैं
आज से हमने तेरा नाम ग़ज़ल रखा हैं

मैंने शाहों की मोहब्बत का भरम तोड़ दिया
मेरे कमरे में भी एक “ताजमहल” रखा हैं

haR ek harf ka andaaz badal rakha hain
Aaj se humne tera naam gazal rakha hain

Maine shaahon ki mohabbt ka bharm tod diya
Mere kamre me bhi aek Tajmahal rakha hain

 

Haath Khali Hain Tere Shahar Se Jate Jate,


Haath Khali Hain Tere Shahar Se Jate Jate,
Jaan Hoti Toh Meri Jaan Lutate Jate,
Ab Toh Har Haath Ka Patthar Humein Pehchanta Hai,
Umr Gujri Hai Tere Shahar Mein Aate Jate.
हाथ ख़ाली हैं तेरे शहर से जाते जाते,
जान होती तो मेरी जान लुटाते जाते,
अब तो हर हाथ का पत्थर हमें पहचानता है,
उम्र गुज़री है तेरे शहर में आते जाते।

 

कॉलेज के सब बच्चे चुप हैं काग़ज़ की इक नाव लिए


कॉलेज के सब बच्चे चुप हैं काग़ज़ की इक नाव लिए
चारों तरफ़ दरिया की सूरत फैली हुई बेकारी है

 

यही ईमान लिखते हैं, यही ईमान पढ़ते हैं


यही ईमान लिखते हैं, यही ईमान पढ़ते हैं
हमें कुछ और मत पढवाओ, हम कुरान पढ़ते हैं

यहीं के सारे मंजर हैं, यहीं के सारे मौसम हैं
वो अंधे हैं, जो इन आँखों में पाकिस्तान पढ़ते हैं

Yahi imaan likhte hai, yahi imaan padhte hai
Hume kuch aur mat padhwao, hum kuran padhte hai

Yahi ke saare manzar hai, yahi ke saare mausam hai
wo andhe hai, jo in aankho me Pakisthan padhte hai

 

मैंने शाहों की मोहब्बत का भरम तोड़ दिया


मैंने शाहों की मोहब्बत का भरम तोड़ दिया
मेरे कमरे में भी एक “ताजमहल” रखा हैं

 

Shakhon Se Tuut Jaayen Vo Patte Nahin Hain Ham


Shakhon Se Tuut Jaayen Vo Patte Nahin Hain Ham
Andhi Se Koi Kah De Ki Auqat Men Rahe

शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम
आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे

 

काम सब गेरज़रुरी हैं, जो सब करते हैं


काम सब गेरज़रुरी हैं, जो सब करते हैं
और हम कुछ नहीं करते हैं, गजब करते हैं

आप की नज़रों मैं, सूरज की हैं जितनी अजमत
हम चरागों का भी, उतना ही अदब करते हैं

Kam sab gerjaruri hain, jo sab karte hain
Aur hum kuch nahi karte, gajab karte hain

Aap ki nazaron mein, sooraj ki hain jitni ajmat
Hum charaagon ka bhi, utna hi adab karte hain

कभी महक की तरह हम गुलों से उड़ते हैं


कभी महक की तरह हम गुलों से उड़ते हैं
कभी धुएं की तरह पर्वतों से उड़ते हैं

ये केचियाँ हमें उड़ने से खाक रोकेंगी
की हम परों से नहीं हौसलों से उड़ते हैं

Kabhi mahak ki tarah hum gulon se udate hain
kabhi dhuyen ki tarah parvaton se udate hain

Ye kechiya hume udne se khaak rokengi
Ki hum paron se nahi housalon se udate hain

नदी ने धूप से क्या कह दिया रवानी में


नदी ने धूप से क्या कह दिया रवानी में
उजाले पांव पटकने लगे हैं पानी में

ये कोई और ही किरदार है तुम्हारी तरह
तुम्हारा ज़िक्र नहीं है मिरी कहानी में

अब इतनी सारी शबों का हिसाब कौन रखे
बड़े सवाब कमाए गए जवानी में

चमकता रहता है सूरजमुखी में कोई और
महक रहा है कोई और रात-रानी में

ये मौज मौज नई हलचलें सी कैसी हैं
ये किस ने पांव उतारे उदास पानी में

मैं सोचता हूं कोई और कारोबार करूं
किताब कौन ख़रीदेगा इस गिरानी में

गुलाब, ख्वाब, दवा, ज़हर, जाम क्या क्या हैं


गुलाब, ख्वाब, दवा, ज़हर, जाम क्या क्या हैं
में आ गया हु बता इंतज़ाम क्या क्या हैं

फ़क़ीर, शाह, कलंदर, इमाम क्या क्या हैं
तुझे पता नहीं तेरा गुलाम क्या क्या हैं

Gulab, khwab, dwa, jahar, jaam, kya kya hain
mein aa gay hun bata intzaam kya kya hain

Fakir, shaah, kalndar, imaam, kya kya hain
Tujhe pata nahi tera gulam kya kya hain

सूरज, सितारे, चाँद मेरे साथ में रहें


सूरज, सितारे, चाँद मेरे साथ में रहें
जब तक तुम्हारे हाथ मेरे हाथ में रहें

शाखों से टूट जाए वो पत्ते नहीं हैं हम
आंधी से कोई कह दे की औकात में रहें

Suraj, sitaare, chaand mere saath me rahe
jab tak tumhare haath mere haath me rahe

Shaakhon se toot jaaye wo patte nahi hain hum
Aandhi se koi kah de ki aukaat me rahe

इस दुनिया ने मेरी वफ़ा का कितना ऊँचा मोल दिया


इस दुनिया ने मेरी वफ़ा का कितना ऊँचा मोल दिया
बातों के तेजाब में, मेरे मन का अमृत घोल दिया

जब भी कोई इनाम मिला हैं, मेरा नाम तक भूल गए
जब भी कोई इलज़ाम लगा हैं, मुझ पर लाकर ढोल दिया

Is duniya ne meri wafa ka kitna ooncha mol diya
Baaton ke Tezab me, mere man ka amrat ghol diya

Jab bhi koi inam mila hai, mera naam tak bhul gaye
Jab bhi koi ilzam laga hai, mujh par lakar dhol diya

तीरगी चांद के ज़ीने से सहर तक पहुंची


तीरगी चांद के ज़ीने से सहर तक पहुंची
ज़ुल्फ़ कन्धे से जो सरकी तो कमर तक पहुंची

मैंने पूछा था कि ये हाथ में पत्थर क्यों है
बात जब आगे बढ़ी तो मेरे सर तक पहुंची

मैं तो सोया था मगर बारहा तुझ से मिलने
जिस्म से आंख निकल कर तेरे घर तक पहुंची

तुम तो सूरज के पुजारी हो तुम्हे क्या मालुम
रात किस हाल में कट-कट के सहर तक पहुंची

एक शब ऐसी भी गुज़री है ख़्यालों में तेरे
आहटें जज़्ब किये रात सहर तक पहुंची

उसकी याद आई हैं साँसों ज़रा धीरे चलो


उसकी याद आई हैं साँसों ज़रा धीरे चलो
धड़कनो से भी इबादत में खलल पड़ता हैं

इन्तेज़ामात नए सिरे से संभाले जाएँ


इन्तेज़ामात नए सिरे से संभाले जाएँ
जितने कमजर्फ हैं महफ़िल से निकाले जाएँ

मेरा घर आग की लपटों में छुपा हैं लेकिन
जब मज़ा हैं, तेरे आँगन में उजाला जाएँ

Intezamat naye sire se sambhale jaaye
Jitne kamjarf hai mahfil se nikale jaaye

Mera ghar aag ki lapton me chupa hai lekin
Jab maza hai, tere aangan me ujaala jaaye

जागने की भी, जगाने की भी, आदत हो जाए


जागने की भी, जगाने की भी, आदत हो जाए
काश तुझको किसी शायर से मोहब्बत हो जाए

दूर हम कितने दिन से हैं, ये कभी गौर किया
फिर न कहना जो अमानत में खयानत हो जाए

Jagne ki bhi jagane ki bhi aadat ho jaye
Kash tujh ko bhi kisi shayer se mohbbt ho jaye

Door hum kitne dinno se hain ye kabhi gaur kiya
Fir na kehna jo ayanat me khayanat ho jaye

आँखों में पानी रखों, होंठो पे चिंगारी रखो


आँखों में पानी रखों, होंठो पे चिंगारी रखो
जिंदा रहना है तो तरकीबे बहुत सारी रखो

राह के पत्थर से बढ के, कुछ नहीं हैं मंजिलें
रास्ते आवाज़ देते हैं, सफ़र जारी रखो

मैं पूजता हूँ जिसे, उससे बेनियाज़ भी हूँ


मैं पूजता हूँ जिसे, उससे बेनियाज़ भी हूँ

मेरी नज़र में वो पत्थर भी है खुदा भी है

 

ऊंचे-ऊंचे दरबारों से क्या लेना


ऊंचे-ऊंचे दरबारों से क्या लेना

नंगे भूखे बेचारों से क्या लेना

अपना मालिक, अपना खालिद अफजल है

आती जाती सरकारों से क्या लेना

 

Loo Bhi Chalti Thi Toh Baad-e-Shaba Kehte The


Loo Bhi Chalti Thi Toh Baad-e-Shaba Kehte The,
Paanv Failaye Andheron Ko Diya Kehte The,
Unka Anjaam Tujhe Yaad Nahi Hai Shayad,
Aur Bhi Log The Jo Khud Ko Khuda Kehte The.
लू भी चलती थी तो बादे-शबा कहते थे,
पांव फैलाये अंधेरो को दिया कहते थे,
उनका अंजाम तुझे याद नही है शायद,
और भी लोग थे जो खुद को खुदा कहते थे।

100+ Rahat Indori shayari and Ghazal Collection

न हमसफ़र न किसी हमनशीं से निकलेगा


न हमसफ़र न किसी हमनशीं से निकलेगा
हमारे पांव का कांटा हमीं से निकलेगा

मैं जानता था कि ज़हरीला सांप बन बन कर
तिरा ख़ुलूस मिरी आस्तीं से निकलेगा

इसी गली में वो भूखा फ़क़ीर रहता था
तलाश कीजे ख़ज़ाना यहीं से निकलेगा

बुज़ुर्ग कहते थे इक वक़्त आएगा जिस दिन
जहां पे डूबेगा सूरज वहीं से निकलेगा

गुज़िश्ता साल के ज़ख़्मों हरे-भरे रहना
जुलूस अब के बरस भी यहीं से निकलेगा

 

जो मेरा दोस्त भी है, मेरा हमनवा भी है


जो मेरा दोस्त भी है, मेरा हमनवा भी है

वो शख्स, सिर्फ भला ही नहीं, बुरा भी है

 

ये हादसा तो किसी दिन गुजरने वाला था


ये हादसा तो किसी दिन गुजरने वाला था
में बच भी जाता तो मरने वाला था

मेरा नसीब मेरे हाथ कट गए
वरना में तेरी मांग में सिन्दूर भरने वाला था

Ye haadsaa to kisee din gujarne waalaa tha
Me bach bhi jaataa to marne waalaa tha

Mera naseeb mere haath kat gaye
Warnaa me teri maang me sindoor bharne waalaa tha

 

मैं वो दरिया हूँ कि हर बूँद भंवर है जिसकी


मैं वो दरिया हूँ कि हर बूँद भंवर है जिसकी

तुमने अच्छा ही किया मुझसे किनारा करके

 

Ajeeb Log Hain Meri Talash Mein Mujhko,


Ajeeb Log Hain Meri Talash Mein Mujhko,
Wahan Par Dhoondh Rahe Hain Jahan Nahi Hun Main,
Main Aayino Se Toh Mayoos Laut Aaya Hun,
Magar Kisi Ne Bataya Bahut Haseen Hun Main.

अजीब लोग हैं मेरी तलाश में मुझको,
वहाँ पर ढूंढ रहे हैं जहाँ नहीं हूँ मैं,
मैं आईनों से तो मायूस लौट आया था,
मगर किसी ने बताया बहुत हसीं हूँ मैं।

 

तुफानो से आँख मिलाओ, सैलाबों पे वार करो


तुफानो से आँख मिलाओ, सैलाबों पे वार करो
मल्लाहो का चक्कर छोड़ो, तैर कर दरिया पार करो

फूलो की दुकाने खोलो, खुशबु का व्यापर करो
इश्क खता हैं, तो ये खता एक बार नहीं, सौ बार करो

Tufaano se aankh milayon, saelabon pe war karo
Mallaho ka chakkar chodo, taer kar dariya paar karo

Phoolon ki dukaane kholo, khushbu ka vyaapar karo
Ishq khata hain, to ye khata aek baar nahi, sau baar karo

 

Roj Taaron Ki Numaaish Mein Khalal Padta Hai,


Roj Taaron Ki Numaaish Mein Khalal Padta Hai,
Chand Pagal Hai Andhere Mein Nikal Padta Hai,
Roj Patthar Ki Himayat Mein Ghazal Likhte Hain,
Roj Sheeshon Se Koi Kaam Nikal Padta Hai.
रोज़ तारों को नुमाइश में ख़लल पड़ता है,
चाँद पागल है अँधेरे में निकल पड़ता है,
रोज़ पत्थर की हिमायत में ग़ज़ल लिखते हैं,
रोज़ शीशों से कोई काम निकल पड़ता है।

 

फ़ैसले लम्हात के नस्लों पे भारी हो गए


फ़ैसले लम्हात के नस्लों पे भारी हो गए
बाप हाकिम था मगर बेटे भिखारी हो गए

देवियां पहुंचीं थीं अपने बाल बिखराए हुए
देवता मंदिर से निकले और पुजारी हो गए

रौशनी की जंग में तारीकियां पैदा हुईं
चांद पागल हो गया तारे भिखारी हो गए

रख दिए जाएंगे नेज़े लफ़्ज़ और होंठों के बीच
ज़िल्ल-ए-सुब्हानी के अहकामात जारी हो गए

नर्म-ओ-नाज़ुक हल्के-फुल्के रूई जैसे ख़्वाब थे
आंसुओं में भीगने के बअद भारी हो गए

 

Tufaano se aankh milayon, saelabon pe war karo


Tufaano se aankh milayon, saelabon pe war karo
Mallaho ka chakkar chodo, taer kar dariya paar karo

Phoolon ki dukaane kholo, khushbu ka vyaapar karo
Ishq khata hain, to ye khata aek baar nahi, sau baar karo

 

सफ़र की हद है वहां तक की कुछ निशान रहे


सफ़र की हद है वहां तक की कुछ निशान रहे
चले चलो की जहाँ तक ये आसमान रहे

ये क्या उठाये कदम और आ गयी मंजिल
मज़ा तो तब है के पैरों में कुछ थकान रहे

Safar ki had hain waha tak ki kuch nishaan rahe
Chale chalon ki jaha tak ye aasaman rahe

Ye kya uthaaye kadam aur aa gayi manjil
Maza to tab hain ke paeron mein kuch thakaan rahe

 

Shahr Kya Dekhen Ki Har Manzar Men Jaale Paḍ Gaye


Shahr Kya Dekhen Ki Har Manzar Men Jaale Paḍ Gaye
Aisi Garmi Hai Ki Piile Phuul Kaale Paḍ Gaye

शहर क्या देखें कि हर मंज़र में जाले पड़ गए
ऐसी गर्मी है कि पीले फूल काले पड़ गए

 

अभी तो सिर्फ़ परिंदे शुमार करना है


अभी तो सिर्फ़ परिंदे शुमार करना है
ये फिर बताएँगे किसको शिकार करना है

 

Ye haadsaa to kisee din gujarne waalaa tha


Ye haadsaa to kisee din gujarne waalaa tha
Me bach bhi jaataa to marne waalaa tha

Mera naseeb mere haath kat gaye
Warnaa me teri maang me sindoor bharne waalaa tha

 

अजनबी ख़्वाहिशें सीने में दबा भी न सकूं 


अजनबी ख़्वाहिशें सीने में दबा भी न सकूं
ऐसे ज़िद्दी हैं परिंदे कि उड़ा भी न सकूं

फूंक डालूंगा किसी रोज़ मैं दिल की दुनिया
ये तिरा ख़त तो नहीं है कि जिला भी न सकूं

मिरी ग़ैरत भी कोई शय है कि महफ़िल में मुझे
उस ने इस तरह बुलाया है कि जा भी न सकूं

फल तो सब मेरे दरख़्तों के पके हैं लेकिन
इतनी कमज़ोर हैं शाख़ें कि हिला भी न सकूं

इक न इक रोज़ कहीं ढूंढ ही लूंगा तुझ को
ठोकरें ज़हर नहीं हैं कि मैं खा भी न सकूं

 

इरादा था कि में कुछ देर तुफानो का मजा लेता


इरादा था कि में कुछ देर तुफानो का मजा लेता
मगर बेचारे दरिया को उतर जाने की जल्दी थी

 

तू कहाँ गुम है, तेरे रेशमी आँचल की कसम


तू कहाँ गुम है, तेरे रेशमी आँचल की कसम,
आँसू अब आँख में कँकर की तरह लगता है ।।

कभी दिल बन के जो सीने से लगा करता था,
अब वही पीठ में खँजर की तरह लगता है ।।

रात की गोद में ये सहमा हुआ आधा चाँद,
मेरे टुटे हुए सागर की तरह लगता है ।।

राहत इँदौरी

Tu kahan gum hai tere reshmi aanchal ki kasam
Aansu ab aankh main kankar ki tarah lagta hai

Kabhi dil banke jo seene se lga karta tha
Wahi ab peeth main khanjar ki tarah lagta hai

Raat ki godh main ye sehma hua aadha chaand
Mere toote huye saagar ki tarah lagta hai

 

उसकी कत्थई आंखों में हैं जंतर मंतर सब


उसकी कत्थई आंखों में हैं जंतर मंतर सब
चाक़ू वाक़ू, छुरियां वुरियां, ख़ंजर वंजर सब

जिस दिन से तुम रूठीं,मुझ से, रूठे रूठे हैं
चादर वादर, तकिया वकिया, बिस्तर विस्तर सब

मुझसे बिछड़ कर, वह भी कहां अब पहले जैसी है
फीके पड़ गए कपड़े वपड़े, ज़ेवर वेवर सब

Uski kathai aankho me jantar-mantar sab
Chaaku-waaku,chhuri-wuri,khanjar-wanjar sab

Jis din se tum ruthi,mujhse ruthe hain
Chaadar-waadar,takiya-wakiya,bistar-wistar sab

Mujhse bichhar ke wo kahaa pahle jaisi hai
Dhile par gaye kapde-wapre,zewar-webar sab

 

Naye kirdaar aaye jaa rahe hain


Naye kirdaar aaye jaa rahe hain

Magar naatak puraana chal raha hai….

 

चेहरों की धूप आंखों की गहराई ले गया


चेहरों की धूप आंखों की गहराई ले गया
आईना सारे शहर की बीनाई ले गया

डूबे हुए जहाज़ पे क्या तब्सरा करें,
ये हादसा तो सोच की गहराई ले गया

हालांकि बेज़ुबान था लेकिन अजीब था,
जो शख़्स मुझ से छीन के गोयाई ले गया

इस वक़्त तो मैं घर से निकलने न पाऊंगा,
बस एक कमीज़ थी जो मेरा भाई ले गया

झूठे क़सीदे लिखे गये उस की शान में,
जो मोतीयों से छीन के सच्चाई ले गया

यादों की एक भीड़ मेरे साथ छोड़ कर,
क्या जाने वो कहां मेरी तन्हाई ले गया

अब असद तुम्हारे लिये कुछ नहीं रहा,
गलियों के सारे संग तो सौदाई ले गया

अब तो ख़ुद अपनी सांसें भी लगती हैं बोझ सी,
उमरों का देव सारी तवनाई ले गया

 

Us Ki Yaad Ayi Hai Sanso Zara Ahista Chalo


Us Ki Yaad Ayi Hai Sanso Zara Ahista Chalo
Dhadkanon Se Bhi Ibadat Men Khalal Padta Hai

उस की याद आई है साँसो ज़रा आहिस्ता चलो
धड़कनों से भी इबादत में ख़लल पड़ता है

 

मैंने अपनी आँखों से लहू छलका दिया


मैंने अपनी आँखों से लहू छलका दिया
एक समन्दर कह रहा है मुझे पानी चाहिए

 

नके एक हादसा बाज़ार में आ जायेगा


नके एक हादसा बाज़ार में आ जायेगा
जो नही होगा वो अखबार में आ जायेगा
चोर उच्चकों की करो कद्र, के मालुम नही,
कौन कब कौन सी सरकार में आ जाएगा

~डाॅ राहत इंदौरी

Ham Se Pahle Bhi Musafir Ka.i Guzre Honge


Ham Se Pahle Bhi Musafir Ka.i Guzre Honge
Kam Se Kam Raah Ke Patthar To Hatate Jaate

हम से पहले भी मुसाफ़िर कई गुज़रे होंगे
कम से कम राह के पत्थर तो हटाते जाते

 

Gulaab ,khwaab , dawa,zehar,jaam kya kya hai,


Gulaab ,khwaab , dawa,zehar,jaam kya kya hai,

mai aa gaya hu bata intezaam kya kya hai.

fakir, shah ,kalndar,emaam kya kya hai,

tujhe pata nhi tera gulaam kya kya hai

 

मैं पर्बतों से लड़ता रहा और चंद लोग


मैं पर्बतों से लड़ता रहा और चंद लोग
गीली ज़मीन खोद के फ़रहाद हो गए

दिलों में आग, लबों पर गुलाब रखते हैं


दिलों में आग, लबों पर गुलाब रखते हैं
सब अपने चहेरों पर, दोहरी नकाब रखते हैं

हमें चराग समझ कर भुझा ना पाओगे
हम अपने घर में कई आफ़ताब रखते हैं

Dilon me aag, labon par gulab rakhte hain
Sab apne chheron par, dohari nakaab rakhte hain

Hume charaag samjh kar bhuja na paaonge
Hum apne ghar me kai aaftaab rakhte hain

 

Charaaghon ko uchhaala ja raha hai


Charaaghon ko uchhaala ja raha hai,
hawa par raub dala ja raha hai.

Na haar apni na apni jeet hogi,
magar sikka uchhaala ja raha hai.

Woh dekho maikade ke raaste mein,
koi allaah wala ja raha hai.

The pehle hi kayi saanp aasteen mein,
ab ek bichchhu bhi pala ja raha hai.

Mere jhoote gilaason ki chhakaa kar,
behakton ko sambhaala ja raha hai.

Humin buniyaad ka patthar hain lekin,
humein ghar se nikaala ja raha hai.

Janaaze par mere likh dena yaaro,
mohabbat karne wala jaa raha hai. !!

– Rahat Indori

 

Use Ab Ke Wafaon Se Gujar Jaane Ki Jaldi Thi


Use Ab Ke Wafaon Se Gujar Jaane Ki Jaldi Thi,
Magar Iss Baar Mujhko Apne Ghar Jaane Ki Jaldi Thi,
Main Aakhir Kaun Sa Mausam Tumhare Naam Kar Deta,
Yehan Har Ek Mausam Ko Gujar Jaane Ki Jaldi Thi.
उसे अब के वफ़ाओं से गुजर जाने की जल्दी थी,
मगर इस बार मुझ को अपने घर जाने की जल्दी थी,
मैं आखिर कौन सा मौसम तुम्हारे नाम कर देता,
यहाँ हर एक मौसम को गुजर जाने की जल्दी थी।

 

उंगलियां यूं न सब पर उठाया करो


उंगलियां यूं न सब पर उठाया करो
खर्च करने से पहले कमाया करो

ज़िन्दगी क्या है खुद ही समझ जाओगे
बारिशों में पतंगें उड़ाया करो

दोस्तों से मुलाक़ात के नाम पर
नीम की पत्तियों को चबाया करो

शाम के बाद जब तुम सहर देख लो
कुछ फ़क़ीरों को खाना खिलाया करो

अपने सीने में दो गज़ ज़मीं बांधकर
आसमानों का ज़र्फ़ आज़माया करो

चांद सूरज कहां, अपनी मंज़िल कहां
ऐसे वैसों को मुंह मत लगाया करो

 

Kabhi mehak ki tarah hum gullo se uddte hai


Kabhi mehak ki tarah hum gullo se uddte hai,

kabhi dhuae ki tarah parwato se udte hai.

yeh kenchiya hume udne se khaak rokegi,

ki hum paro se nahi hauslo se udte hai.

 

Kaaam sab gair zaruri hai , jo sab karte hai


Kaaam sab gair zaruri hai , jo sab karte hai,

aur hum kuch nahi karte hai , gajab karte hai.

aap ki nazro me , suraj ki hai jitni ajmat,

hum charaago ka bhi , utna hi adab karte hai

 

इस से पहले की हवा शोर मचाने लग जाए


इस से पहले की हवा शोर मचाने लग जाए
मेरे “अल्लाह” मेरी ख़ाक ठिकाने लग जाए

घेरे रहते हैं खाली ख्वाब मेरी आँखों को
काश कुछ देर मुझे नींद भी आने लग जाए

साल भर ईद का रास्ता नहीं देखा जाता
वो गले मुझ से किसी और बहाने लग जाए

Is se pahle ki hawa shor machane lag jaaye
Mere “Allaha” meri khak thikane lag jaaye

Ghere rahte hai khali khwab meri aankhon ko
Kaash kuch der mujhe neend bhi aane lag jaaye

Saal bhar Iad ka rasta nahi dekha jaata
Wo gale mujh se kisi aur baahne se lag jaaye

 

नयी हवाओं की सोहबत बिगाड़ देती हैं


नयी हवाओं की सोहबत बिगाड़ देती हैं
कबूतरों को खुली छत बिगाड़ देती हैं

जो जुर्म करते है इतने बुरे नहीं होते
सज़ा न देके अदालत बिगाड़ देती हैं

Nai hawaon ki sohabat bigaad deti hain
Kabootron ko khul cchat bigaad deti hain

Jo jurm karte hain itne bure nahi hote
Sazaa na de ke adaalat bigaad deti hain

 

यहां दरिया पे पाबंदी नहीं है


यहां दरिया पे पाबंदी नहीं है,
मगर पहरे लबों पे लग रहे हैं.

 

कश्ती तेरा नसीब चमकदार कर दिया


कश्ती तेरा नसीब चमकदार कर दिया
इस पार के थपेड़ों ने उस पार कर दिया

अफवाह थी की मेरी तबियत ख़राब हैं
लोगो ने पूछ पूछ के बीमार कर दिया

Kasti tera naseeb chamkadar kar diya
Is paar ke thapedon ne us paar kar diya

Afwah thi ki meri tabiyat khrab hai
Logo ne puch puch ke bimar kar diya

 

झूठी बुलंदियों का धुंआ पार कर के आ


झूठी बुलंदियों का धुंआ पार कर के आ
क़द नापना है मेरा तो छत से उतर के आ

इस पार मुंतज़िर हैं तेरी खुश-नसीबियां
लेकिन ये शर्त है कि नदी पार कर के आ

कुछ दूर मैं भी दोशे-हवा पर सफर करूं
कुछ दूर तू भी खाक की सुरत बिखर के आ

मैं धूल में अटा हूं मगर तुझको क्या हुआ
आईना देख जा ज़रा घर जा संवर के आ

सोने का रथ फ़क़ीर के घर तक न आयेगा
कुछ मांगना है हमसे तो पैदल उतर के आ


Also read-

Wo kisi ek Gunah ki tarah bahut Khubsoorat thi………..

 -Ashk Kannauji (Abhay) Collection

Ye Zaruri Hai Ki Ankhon Ka Bharam Qaayem Rahe


Ye Zaruri Hai Ki Ankhon Ka Bharam Qaayem Rahe
Niind Rakkho Ya Na Rakkho Khvab Meyari Rakho

ये ज़रूरी है कि आँखों का भरम क़ाएम रहे
नींद रक्खो या न रक्खो ख़्वाब मेयारी रखो

अब हम मकान में ताला लगाने वाले हैं


अब हम मकान में ताला लगाने वाले हैं
पता चला हैं की मेहमान आने वाले हैं

100+ Rahat Indori shayari and Ghazal Collection part 2

Teri har baat mohabbat mai gawara karke


Teri har baat mohabbat mai gawara karke, Dil ke bazaar mai baithe hai khasaara karke,
Muntazir hoon ke sitaaro ki zara aankh lage, Chaand ko chat pe bula lunga ishara karke

Ab To Har Haath Ka Patthar Hamen Pahchanta Hai


Ab To Har Haath Ka Patthar Hamen Pahchanta Hai
Umr Guzri Hai Tire Shahr Men Aate Jaate

अब तो हर हाथ का पत्थर हमें पहचानता है
उम्र गुज़री है तिरे शहर में आते जाते

फूंक डालुंगा मैं किसी रोज दिल की दुनिया


फूंक डालुंगा मैं किसी रोज दिल की दुनिया
ये तेरा खत तो नहीं है जो जला ना सकूं

अगर खिलाफ है होने दो जान थोड़ी है


अगर खिलाफ है होने दो जान थोड़ी है
ये सब धुआँ है कोई आसमान थोड़ी है
लगेगी आग तो आएँगे घर कई जद में
यहाँ पे सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है
हमारे मुह से जो निकले वही सदाकत
हमारे मुह में तुम्हारी जबां थोड़ी है
में जानत हूँ के दुश्मन भी कम नहीं लेकि
हमारी तरह हथेली पे जान थोड़ी है
जो आज साहिब-ए- मनसद है कल नहीं होंगे
किरायेदार है जाती मकान थोड़ी है
सभी का खून है यहाँ की मिटटी में
किसी के बाप का हिन्दुस्तान थोड़ी है

लवे दीयों की हवा में उछालते रहना


लवे दीयों की हवा में उछालते रहना
गुलो के रंग पे तेजाब डालते रहना

में नूर बन के ज़माने में फ़ैल जाऊँगा
तुम आफताब में कीड़े निकालते रहना

Lave deeyon ki hawa mein uchhalte rahna
Gulo ke rang pe tezab daalte rahna

Mein noor ban ke jamaane mein fel jaaunga
Tum aaftaab mein keede nikalte rahna

जागने की भी, जगाने की भी, आदत हो जाए


जागने की भी, जगाने की भी, आदत हो जाए
काश तुझको किसी शायर से मोहब्बत हो जाए

दूर हम कितने दिन से हैं, ये कभी गौर किया
फिर न कहना जो अमानत में खयानत हो जाए

Jagne ki bhi jagane ki bhi aadat ho jaye
Kash tujh ko bhi kisi shayer se mohbbt ho jaye

Door hum kitne dinno se hain ye kabhi gaur kiya
Fir na kehna jo ayanat me khayanat ho jaye

तुफ्हानों से आँख मिलाओ सैलाबों पर वर करो


तुफ्हानों से आँख मिलाओ सैलाबों पर वर करो
मल्लाहों का चक्कर छोड़ो तहर के दरिया पार करो
तुमको तुम्हारा फ़र्ज़ मुबारक हमको मुबारक अपना सुलूक
हम फूलों की शाकें तराशें तुम चाक़ू पर धार करो
फूलों की दुकाने खोलों खुशबु का व्यापार करो
इश्क खता है तो ये खता एक बार नहीं सौ बार करो

मैं लाख कह दूं कि आकाश हूं ज़मीं हूं मैं


मैं लाख कह दूं कि आकाश हूं ज़मीं हूं मैं
मगर उसे तो ख़बर है कि कुछ नहीं हूं मैं

अजीब लोग हैं मेरी तलाश में मुझ को
वहां पे ढूंढ रहे हैं जहां नहीं हूं मैं

Ek ek harf ka andaaz badal rakha hai


Ek ek harf ka andaaz badal rakha hai, Aaj se humne tera naam ghazal rakha hai,
Maine shaho ki mohabbat ka bharam tod dia, Mere kamre mai bhi ek tajmahal rakha hai

Bahut Ġhurur Hai Dariya Ko Apne Hone Par


Bahut Ġhurur Hai Dariya Ko Apne Hone Par
Jo Meri Pyaas Se Uljhe To Dhajjiyan Uḍ Jaayen

बहुत ग़ुरूर है दरिया को अपने होने पर
जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियाँ उड़ जाएँ

Log Har Mod Par Rukh Rukh Ke Sabhalte Q Hai


Log Har Mod Par Rukh Rukh Ke Sabhalte Q Hai
Itna Darte Hai To Ghar Se Nikalte Q Hai
Mein Na Jugnu Ho Na Koi Tara Ho Ye Raushni Wale
Mere Naam Se Itna Jalte Q Hai

जवानिओं में जवानी को धुल करते हैं


जवानिओं में जवानी को धुल करते हैं
जो लोग भूल नहीं करते, भूल करते हैं

अगर अनारकली हैं सबब बगावत का
सलीम हम तेरी शर्ते कबूल करते हैं

Jawaniyon me jawani ko dhul karte hain
Jo log bhul nahi karte, bhul karte hain

Agar Anaarkali hain sabab bagaavat ka
Salim hum teri sharten kabool karte hain

नए सफ़र का नया इंतज़ाम कह देंगे


नए सफ़र का नया इंतज़ाम कह देंगे
हवा को धुप, चरागों को शाम कह देंगे

किसी से हाथ भी छुप कर मिलाइए
वरना इसे भी मौलवी साहब हराम कह देंगे

Naye safar ka naya intzaam kah denge
Hawa ko dhup, charaagon ko shaam kah denge

Kisi se hatth bhi chhupa kar milaiye
Warna maulvi saahab ise bhi haraam kah denge

मुझसे पहले वो किसी और की थी


मुझसे पहले वो किसी और की थी, मगर कुछ शायराना चाहिये था,
चलो माना ये छोटी बात है, पर तुम्हें सब कुछ बताना चाहिये था|

Nayi hawaaon ki sohbat bigaad deti hai


Nayi hawaaon ki sohbat bigaad deti hai, Kabtooro ko khuli chat bigaad deti hai,
Aur jo jurm karte hain itne bure nahi hote, Saza na deke adaalat bigaad deti hai

बीमार को मरज़ की दवा देनी चाहिए


बीमार को मरज़ की दवा देनी चाहिए
मैं पीना चाहता हूं पिला देनी चाहिए

अल्लाह बरकतों से नवाज़ेगा इश्क़ में
है जितनी पूंजी पास लगा देनी चाहिए

दिल भी किसी फ़क़ीर के हुजरे से कम नहीं
दुनिया यहीं पे ला के छुपा देनी चाहिए

मैं ख़ुद भी करना चाहता हूं अपना सामना
तुझ को भी अब नक़ाब उठा देनी चाहिए

मैं फूल हूं तो फूल को गुलदान हो नसीब
मैं आग हूं तो आग बुझा देनी चाहिए

मैं ताज हूं तो ताज को सर पर सजाएं लोग
मैं ख़ाक हूं तो ख़ाक उड़ा देनी चाहिए

मैं जब्र हूं तो जब्र की ताईद बंद हो
मैं सब्र हूं तो मुझ को दुआ देनी चाहिए

मैं ख़्वाब हूं तो ख़्वाब से चौंकाइए मुझे
मैं नींद हूं तो नींद उड़ा देनी चाहिए

सच बात कौन है जो सर-ए-आम कह सके
मैं कह रहा हूं मुझ को सज़ा देनी चाहिए

Sawal Wo Puch Rahe Hai Udaas Hone Ka


Sawal Wo Puch Rahe Hai Udaas Hone Ka
Mera Mizaaj Nahi Be Libaas Hone Ka
Naya Bahana Hai Har Pal Udaas Hone Ka
Ye Faida Hai Tere Ghar K Paas Hone Ka

जवान आँखों के जुगनू चमक रहे होंगे


जवान आँखों के जुगनू चमक रहे होंगे
अब अपने गाँव में अमरुद पक रहे होंगे

भुलादे मुझको मगर, मेरी उंगलियों के निशान
तेरे बदन पे अभी तक चमक रहे होंगे

Jawaan aankhon ke jugnoo chamak rahe honge
Ab apne gaonv me amrood pak rahe honge

Bhulade mujhko magar, meri ungaliyon ke nishaan
tere badan pe abhi tak chamak rahe honge

किसने दस्तक दी ये दिल पर


किसने दस्तक दी ये दिल पर
कौन है आप तो अंदर है, ये बाहर कौन है.

वो इक किताब जो मंसूब तेरे नाम से है


वो इक किताब जो मंसूब तेरे नाम से है
उसी किताब के अंदर कहीं कहीं हूं मैं

सितारो आओ मिरी राह में बिखर जाओ
ये मेरा हुक्म है हालांकि कुछ नहीं हूं मैं

यहीं हुसैन भी गुज़रे यहीं यज़ीद भी था


यहीं हुसैन भी गुज़रे यहीं यज़ीद भी था
हज़ार रंग में डूबी हुई ज़मीं हूं मैं

ये बूढ़ी क़ब्रें तुम्हें कुछ नहीं बताएंगी
मुझे तलाश करो दोस्तो यहीं हूं मैं

– राहत इंदौरी

Ban ke ik hadasa bazaar me aa jayega


Ban ke ik hadasa bazaar me aa jayega, Jo nahi hoga wo akhbaar me aa jayega,

Chor uchkkon ki karo kadr, ki maloom nahi,

Kaun, kab, kon si sarkaar me aa jayega

सरहदों पर तनाव हे क्या


सरहदों पर तनाव हे क्या
ज़रा पता तो करो चुनाव हैं क्या

शहरों में तो बारूदो का मौसम हैं
गाँव चलों अमरूदो का मौसम हैं

Sarhadon par tanaav he kya
Jara pata to karo chunaav hain kya

Shaharon me to baaroodo ka mausam hain
Gaonv chalo amroodon ka mausam hain

Yahin imaan likhte hai


Yahin imaan likhte hai, yahin imaan padhte hain,
Hume kuch aur mat padhwao, hum Quran padhte hain,

Yahi ke saare manzar hai, yahi ke saare mausam hain,
wo andhe hai, jo in aankho me Pakisthan padhte hain

 

ये किसने कह दिया तुमसे


ये किसने कह दिया तुमसे इनका बम से रिश्ता है

बहुत हैं जख्म सीने में, फकत मरहम से रिश्ता है

 

Botalen Khol Kar To Pi Barson


Botalen Khol Kar To Pi Barson
Aaj Dil Khol Kar Bhi Pi Jaaye

बोतलें खोल कर तो पी बरसों
आज दिल खोल कर भी पी जाए

Ab hum makaan ke tala lagaane wale hain


Ab hum makaan ke tala lagaane wale hain
Pata chala hain ki mehaman aane wale hain

लहू को रंग जुनूं को कलम बनाने लगे


लहू को रंग जुनूं को कलम बनाने लगे
हम अपने शहर को शहर-ए-सितम बनाने लगे
ये किसने छीन ली बच्चों के हाथ से मिट्टी
जो कल खिलौने बनाते थे बम बनाने लगे

 

मुझे वो छोड़ गया ये कमाल है उसका


मुझे वो छोड़ गया ये कमाल है उसका
इरादा मैंने किया था के छोड़ दूँगा उसे