Ishwar kaha rehte hain aur kya karte hain (prerak katha)

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ईश्वर कहां रहते हैं, क्या करते हैं, कैसे देखते हैं? प्रेरक कथा

किसी गांव में एक गरीब ब्राहमण रहता था. वह लोगों के घरों में पूजा पाठ कर के अपनी जीविका चलाता था. एक दिन एक राजा ने इस ब्राहमण को पूजा के लिए बुलवाया. ब्राहमण ख़ुशी ख़ुशी राजा के यहाँ चला गया.

Ishwar kaha rehte hain aur kya karte hain (prerak katha)

जब ब्राहमण अपने घर को आने लगा तो राजा ने ब्राहमण से पूछा- आप ईश्वर की बातें करते हैं. पूजा- अर्चना से ईश्वर प्राप्ति का मार्ग बताते हैं. बताइए, ईश्वर कहाँ रहता है, किधर देखता है और क्या करता है?

ब्राहमण ने कुछ सोचने के बाद राजा से कहा- महाराज मुझे कुछ समय चाहिए इस सवाल का उत्तर देने के लिए.

राजा ने एक महीने का समय दिया. एक महीने बाद आकर इस सवाल का उत्तर दे जाना.

ब्राहमण इसका उत्तर सोचता रहा और घर की ओर चलता रहा परन्तु उसके कुछ समझ नहीं आ रहा था. समय बीतने के साथ साथ ब्राहमण की चिंता भी बढ़ने लगी और ब्राहमण उदास रहने लगा.

ब्रह्मण का एक बेटा था जो काफी होशियार था उसने अपने पिता से उदासी का कारण पूछा. ब्राहमण ने बेटे को बताया कि राजा ने उस से एक सवाल का जवाब माँगा है कि ईश्वर कहाँ रहता है, किधर देखता है और क्या करता है? मुझे कुछ सूझ नहीं रहा है.

बेटे ने कहा-पिताजी आप मुझे राजा के पास ले चलना. उनके सवालों का जवाब मैं दूंगा. ठीक एक महीने बाद ब्राह्मण अपने बेटे को साथ लेकर राजा के पास गया और बोला आप के सवालों के जवाब मेरा बेटा देगा.

राजा ने ब्राहमण के बेटे से पूछा बताओ ईश्वर कहाँ रहता है?

ब्राहमण के बेटे ने कहा- राजन! पहले अतिथि का आदर सत्कार किया जाता है. आपने तो बिना आतिथ्य किए ही प्रश्न पूछना शुरू कर दिया है.

राजा इस बात पर कुछ लज्जित हुए और अतिथि के लिए दूध लाने का आदेश दिया. दूध का गिलास आया. लड़के ने गिलास हाथ में पकड़ा और दूध में अंगुली डालकर घुमाकर बार बार दूध को बाहर निकाल कर देखने लगा.

राजा ने पूछा ये क्या कर रहे हो? लड़का बोला- सुना है दूध में मक्खन होता है. मैं वही देख रहा हूं कि दूध में मक्खन कहाँ है? आपके राज्य के दूध में तो मक्खन ही गायब है.

राजा ने कहा दूध में मक्खन होता है,परन्तु वह ऐसे दिखाई नहीं देता. दूध को जमाकर दही बनाया जाता है. फिर दही को मथते हैं तब जाकर मक्खन प्राप्त होता है.

ब्राहमण के बेटे ने कहा- महाराज यही आपके सवाल का जवाब है. परमात्मा प्रत्येक जीव के अन्दर विद्यमान है. उसे पाने के लिए नियमों का अनुष्ठान करना पड़ता है.

मन से ध्यानपूर्वक अभ्यास से आत्मा में छुपे हुए परम देव पर आत्मा के निवास का आभास होता है. जवाब सुन कर राजा खुश हुआ ओर कहा अब मेरे दूसरे सवाल का जवाब दो, ईश्वर किधर देखता है?

ब्राहमण के बेटे ने तुरंत एक मोमबत्ती मगाई और उसे जलाकर राजा से बोला- महाराज यह मोमबत्ती किधर रोशनी करती है? राजा ने कहा इसकी रोशनी चारों तरफ है. लड़के ने कहा यह ही आप के दूसरे सवाल का जवाब है.

परमात्मा सर्वदृष्टा है और सभी प्राणियों के कर्मों को देखता है. राजा ने खुश होते हुए कहा कि अब मेरे अंतिम सवाल का जवाब दो कि परमात्मा क्या करता है?

ब्राहमण के बेटे ने पूछा- यह बताइए कि आप इन सवालों को गुरु बनकर पूछ रहे हैं या शिष्य बन कर?

राजा थोड़े विनम्र होकर बोला- मैं यह प्रश्न शिष्य बनकर पूछ रहा हूं.

यह सुनकर लड़के ने कहा- वाह महाराज! आप भले शिष्य हैं. गुरु नीचे जमीन पर और शिष्य सिंहासन पर विराजमान है. धन्य है महाराज आप को और आप के शिष्टचार को. यह सुनकर राजा लज्जित हुए.

अपने सिहासन से नीचे उतरे और ब्राहमण बेटे को सिंहासन पर बैठा कर पूछा- अब बताइए ईश्वर क्या करता है?

जवाब मिला- अब क्या बतलाना रह गया है! ईश्वर यही करता है, राजा को रंक और रंक को राजा बना देता है.

राजा ने उस ब्राहमण के पुत्र को अपना सलाहकार बना लिया.

परमात्मा प्रत्येक जीव के ह्रदय में आत्मा रूप से मौजूद है. परमात्मा के साथ प्रेम करेंगे तो वह आपको सही मार्ग दिखाएंगे. इससे सभी प्रकार के सुख ऐश्वर्य की प्राप्ति होगी.

परमात्मा कार्य नहीं करेंगे, मार्ग देंगे. यदि उनकी शरण में हैं तो उचित मार्ग दिखता रहेगा, विमुख हुए तो मार्गदर्शक के अभाव में कुमार्ग पर जाएंगे. स्वाभाविक है कि ऐसे में दुर्गति ही होती है.

पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन इसीलिए होते हैं. आपमें स्वयं को उस शक्ति से जोड़ने की क्षमता आए जो आपके भीतर ही मौजूद है लेकिन आप उसे पहचान नहीं पा रहे, उससे जुड़ नहीं पा रहे.

अहं ब्रह्मोस्मि को आप जब इस तरह समझने लगें कि आपमें भी ब्रह्म का वास है जो आपकी निगरानी कर रहा है. उससे कुछ छुपा नहीं है. कर्म करते समय सोच लें कि किसी की आप पर लगातार नजर है.

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