Coronavirus par ek pita ki dard bhari kahani

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Coronavirus par ek pita ki dard bhari kahani


बालकिशन जी को रातसे तेज बुखार था और आज सुबह से सूखी खांसी हो रही थी ये देख उनके छोटे बेटे रवि ने बडे भाई सुमित से कहा-भैया …आज पिताजी को सूखी खांसी हो रही है कहीं ये लक्षण कोरोना के तो नही…
हां रवि मुझे भी लग रहा है तू एक काम कर पिताजी की चारपाई बाहर आंगन मे कर …तबतक मे हेल्पलाइन पर फोन करता हूं… सुमित ने कहा…. ना भैया ना …मे तो हाथ भी ना लगाऊं…ये वायरस छूने से फैलता है मे कयो करूं मेरे बीबी बच्चे.. कहीं उन्हें… नही आप करो …मे…मे नहीं मेरे भी तो बीबी बच्चे है …दोनों भाइयों की बातें सुन रही दोनों की पत्नियों ने रसोईघर से बाहर आते कहा-आप दोनों को कोई जरूरत नही छूने की …मांजी को बोलिए …उनकी पत्नी है वही करेगी…

Coronavirus par ek pita ki dard bhari kahani

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बालकिशन जी की आँखें भीगने लगी …जिन औलाद को वो अपने बुढापे की लाठी मानते थे वो एक बीमारी के चलते उनसे ऐसे दूरी बना रही है जिसका पता चलना अभी बाकी है …और पत्नी रमा को कया बोले उनकी चारपाई बाहर करवाने मे ..उसे तो खुद अस्थमा है ..
बच्चों मे स्वयं अपनी चारपाई बाहर कर लूंगा और फोन है मेरे पास मे स्वयं बुला लूंगा हेल्पलाइन …कहते सिसक उठे …अभी वह फोन करके हटे ही थे की बहुओ की आवाजें साफ साफ सुनाई दी -कोई जरूरत नही ..बाबूजी के पास जाने की या पानी देने की कहीं…
अबतो बालकिशन जी रो पडे वह जानते थे ये वायरस पास आने से मना करता है मगर एक आपसी व्यहवार और प्यार सम्मान भी तो कुछ होता है मगर ये तो ऐसे व्यहवार कर रहे है वह ये देखकर स्तब्ध थे वह चाहते थे जल्द से जल्द ऐम्बुलेंस आए और उन्हें इन नकली रिश्तों से दूर ले जाए…..
पत्नी उनकी और आने को हुई तो उन्होंने इशारे से मना कर दिया जीवनभर साथ देनेवाली को वो ये बीमारी नही देना चाहते थे …
कुछ ही समय मे हेल्पलाइन की पूरी टीम ऐम्बुलेंस सहित आई और पूरे घर को सेनेटाइज किया बालकिशन जी को आइसोलेट के लिए ले गई साथ ही पूरे परिवार को क्वारटीन के लिए कहा वह ना बाहर जाएंगे ना किसी से मिलेंगे …अस्पताल मे बालकिशन जी की पहली रिपोर्ट पोजोटिव आई …पूरे चौदह दिनों डाक्टर की देखरेख मे पूरी सावधानी बरतने पर दूसरी रिपोर्ट नेगेटिव आई ..मगर एहतियातन उन्हें घर पर खुदको क्वारटीन करने को कहा गया …घर पहुंचे बालकिशन जी ने कुछ दूरी से अपने दोनों बेटों बहूओ को बुलाया और कहा-मैने अपनी वसीयत बनवा दी है जो नालायक बच्चे एक बीमारी के डर से अपने पिता से ऐसे छूआछूत जैसे गंदा व्यहवार कर रहे थे वह कया उनकी और बुढापे मे सेवा करेंगे ..मैंने तुम्हें पढा लिखाकर अच्छे काम करवा दिए अब तुम मेरे घर को लाँकडाउन के समाप्त होने पर खाली कर देना …मेरी संपूर्ण संपत्ति पर मेरे बाद मेरी पत्नी का अधिकार है और उसके बाद ये सब एक वृद्ध आश्रम को स्वेच्छा से दान मे चली जाएगी …
बेटे बहुऐ एकदूसरे की शक्लें देखकर रो रहे थे वही पत्नी रमा और बालकिशन जी अपने अंतिम निर्णय पर संतुष्ट थे।।

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