Bhai ne bachai behan ki jaan ek bhai behan ki kahani

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इस कहानी के पात्र राकेश और गौरी हैं। राकेश अपनी बहन गौरी से बहुत प्रेम करता है, और गौरी भी अपने भाई राकेश से बहुत प्यार करती है। राकेश की उम्र 17 साल है और गौरी की 15 साल।  दोनों एक ही कॉलेज में पढ़ते थे।  राकेश जब कभी अपनी बहन को कुछ करने को कहता तो वह मना नहीं करती थी, और न कभी राकेश मना करता था। 

Bhai ne bachai behan ki jaan ek bhai behan ki kahani

Bhai ne bachai behan ki jaan ek bhai behan ki kahani

एक दिन दोनों भाई बहन कॉलेज से घर वापस आ रहे थे।  अचानक गौरी रास्ते में गीर पड़ती है और बेहोश हो जाती है। राकेश गौरी की यह हालत देखकर घबरा जाता है, रोने लगता है। वह अपनी बहन को उठाकर पेड़ के नीचे छाँव में ले जाता है। उसके मुँह पर पानी मारकर उसे जगाने की कोशिश करता है। कुछ समय बीतने के बाद गौरी को होश आता है। गौरी अपने भाई की यह हालत देखकर रोने लगती है। 

कुछ दिनों बाद भी गौरी कुछ इसी तरह गिरकर बेहोश हो जाती है। तब राकेश अपनी बहन को अस्पताल ले जाता है और उसका इलाज करता है। डॉक्टर गौरी का चेकअप करने के बाद राकेश को केबिन में बुलाता है। तभी उसे डॉक्टर बताता है कि गौरी के दिल में छेद है। यह बात सुनते ही राकेश रोने लगता है। लेकिन डॉक्टर उसे समझता है कि अगर तुम इस तरह रोने लगोगे तो तुम्हारी बहन को सदमा लग सकता है और उसे दिल का दौरा भी पड़ सकता है। यह बात सुनते ही राकेश अपने आँसू पोंछ लेता है और मुस्कुराता हुआ केबिन से बाहर आता है। 

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राकेश, गौरी को इस बात की भनक तक नहीं लगने देना चाहता है लेकिन राकेश यह भी जानता है कि गौरी के पास ज्यादा समय नहीं है। राकेश अंदर ही अंदर रोते रहता है। राकेश डॉक्टर के पास फिर से मिलने के लिए जाता है और डॉक्टर से पूछता है कि क्या मैं अपना दिल अपनी बहन गौरी को दे सकता हूँ। डॉक्टर यह बात सुनकर बहुत भावुक हो जाता है। डॉक्टर राकेश को बहुत समझाता है पर राकेश डॉक्टर की कोई भी बात नहीं मानता। राकेश किसी भी हाल में अपनी बहन गौरी को बचाना चाहता है। वह अपनी जान देकर भी अपनी बहन की जान बचाना चाहता है। 

राजेश जब डॉक्टर के पास जाकर वापस लौटता है तब गौरी राकेश से कई सारे सवाल पूछती है पर राकेश गौरी के किसी भी सवाल का जवाब नहीं देता है। गौरी के ज्यादा पूछने पर राकेश उसे डाँट देता है। राकेश सोच विचार कर एक निर्णय लेता है कि उसके मरने के बाद उसकी बहन को उसकी मौत का गम नहीं होना चाहिए। तभी से वह अपनी बहन से बात करना बंद कर देता है। गौरी के पूछने पर उसे डांटता है। राकेश शराब का सेवन करने लगता है। गौरी राकेश से नाराज़ रहने लगती है। 

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कुछ दिनों बाद राकेश फिर से डॉक्टर के पास जाता है और डॉक्टर से ऑपरेशन  की तैयारी करने को कहता है। गौरी को अस्पताल लाया जाता है। डॉक्टर राकेश का ऑपरेशन करता है और राकेश का दिल गौरी को दे दिया जाता है। 

कुछ दिनों बाद जब गौरी राकेश को अपने आस पास नहीं देखती तब वह डॉक्टर से पूछती है की मेरा भाई राकेश कहा है। डॉक्टर के पास गौरी के किसी भी सवाल का जवाब नहीं होता है। गौरी के ज्यादा जोर देने पर डॉक्टर गौरी को सब कुछ बता देता है। राकेश का शराब का सेवन करना और गौरी से लड़ाई करना मात्र एक नाटक था। वह सब कुछ गौरी की भलाई के लिए कर रहा था। तुम्हारे भाई राकेश ने तुम्हारी जान बचाने के लिए अपना दिल तुम्हे दे दिया है। डॉक्टर की यह सब बातें सुनकर गौरी फुट फुट कर रोने लगती है। 

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