Aakhir wo Insan kaha gayab ho gaya tha Suspense detective story

Aakhir wo Insan kaha gayab ho gaya tha Suspense detective story
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अविनाश अपनी साई डिटैक्टिव एजन्सि के केबिन में बैठा कुछ काम कर रहा है। तब तक राजू प्रवेश करता है।

“चलिए सर आज शाम को सराय रानी ढाबा मे खाना खाकर आते हैं। आज बाहर खाने की इच्छा हो रही है और वह भी शुद्ध शाकाहारी। आपको तो पता ही है कि सराय रानी ढाबा शाकाहारी खानों के लिए कितना मशहूर हैं।”

Aakhir wo Insan kaha gayab ho gaya tha Suspense detective story

Aakhir wo Insan kaha gayab ho gaya tha Suspense detective story

अविनाश हंस कर बोलता है, “राजू तुम भी ना, 30 किलोमीटर दूर जाओगे वो भी खाना खाने के लिए। अच्छा ठीक है। बेबी और इंस्पेक्टर मनोज को भी बुला लेते हैं। मैं तुम दोनों को रात 9:00 बजे घर से पिकअप कर लूंगा और इंस्पेक्टर मनोज को भी ले लूँगा।” थोड़ी देर बाद बेबी केबिन में प्रवेश करती है।

अविनाश कहता है, “आज रात मैं,राजू और इंस्पेक्टर मनोज सराय रानी ढाबा पर खाना खाने के लिए जा रहे हैं। तुम्हें भी चलना है।”

“नहीं सर, मैं तो आपके पास आने ही वाली थी। मैं घर जा रही हूँ। आज मेरी सहेली की शादी है। आज मैं आपके साथ नहीं चलूँगी। मेरा डिनर उधार रहा।” इसके बाद बेबी चली जाती है।

“राजू, मैं भी निकलता हूँ। तुम भी थोड़ी देर बाद डिटेक्टिव एजेंसी बंद करके घर चले जाना। मैं 9:00 बजे तुमको तुम्हारे घर से पिकअप कर लूँगा।” रात 9:00 बजे अविनाश, राजू को उसके घर से पिकअप करता है और वो तीनों अविनाश, मनोज और राजू आजमनगर से सराय रानी ढाबा की तरफ चल देते हैं। अविनाश धीरे-धीरे अपनी होंडासिटि कार को हाईवे पर दौड़ा रहा होता है।

ढाबे पर खाना खाने के बाद राजू अविनाश से कहता है, “सर इधर कुछ बड़े अच्छे फॉर्म हाउस हैं, चलिए उधर का चक्कर लगाकर आते हैं।” इसके बाद अविनाश अपनी कार हाईवे से उतारकर कच्ची सड़क पर दौडाने लगता है। हालांकि रास्ता कच्चा था पर टूटा फूटा नहीं था। कार धीरे-धीरे चल रही थी। अचानक उन तीनों की नजर एक फार्म हाउस पर पड़ती है।

राजू अविनाश से कहता है, “सर कितना खूबसूरत बना हुआ है। काश ! अपना भी एक फार्महाउस होता।”

“अबे राजू तुझे पैसे की क्या कमी है ? तेरे बाप का इतना बड़ा ट्रांसपोर्ट का कारोबार है खरीद ले एक-आध फार्महाउस।”

“कहाँ सर वैसे ही पिताजी मुझसे बहुत नाराज रहते हैं। कहते हैं दिनभर मुझे जासूसी का भूत सवार रहता है। वो मुझे घर में घुसने देते हैं इतना क्या बहुत नहीं है ?” अचानक कार की रोशनी मे उन्होंने देखा फार्महाउस से थोड़ी दूर पर पुलिया पर बैठे एक वृद्ध महिला रो रही है। अविनाश तुरंत गाड़ी रोक देता है।

“राजू, लगता है कि यह महिला किसी दिक्कत में है।”

“लेकिन सर रात के 11:00 बजे वह भी ऐसी वीरान जगह पर।”

“चलो आओ पूछते हैं। शायद हम कोई मदद कर सके।” इसके बाद वे तीनों गाड़ी से उतरकर उस महिला के पास चले जाते हैं।

अविनाश बड़े अदब से पूछता है,-“माँ जी माफ कीजिएगा, आप क्यों रो रही हैं ? क्या आपको कोई कष्ट है ? क्या हम लोग आपकी कोई मदद कर सकते हैं ?”

उस महिला ने अपने आँसू पोछे और अविनाश से कहा, “बेटा मेरा गांव यहाँ से थोड़ी दूरी पर है। बात दरअसल यह है कि मेरा लड़का ‘रानू’ 1 दिन से घर नहीं पहुंचा है। मैं उसी को यहां ढूंढने आई थी। मेरा लड़का इस फार्म हाउस का केयरटेकर है। कल रात को वो यह बोल कर गया था कि देर रात को घर लौटेगा पर आया नहीं लेकिन जब वो आज पूरे दिन घर नहीं आया तो मुझे घबराहट होने लगी इसलिए मैं उसे खोजने फार्महाउस पर सीधा चली आई लेकिन मैं यहां क्या देखती हूं कि फार्महाउस को पहले से ही ताला लगा है।”

अविनाश बोला, “लेकिन माँ जी उसका कोई मोबाइल नंबर तो होगा। आपने उस पर कॉल करके देखा की नहीं।”

“वो तो मोबाइल घर पर ही छोड़ कर गया है। वो गया भी नाइट सूट मे है और अपनी बाइक भी घर ही छोड़ कर गया है।”

“इसका मतलब कहीं पास मे ही गया होगा। आपने उसके दोस्त से बात की है।”

“अभी नहीं की है। कल सुबह पूछताछ करूंगी।”

“देखिए आपको घबराने की कोई जरूरत नहीं है। क्या वह पहले भी कभी गायब रहा है ?”

“नहीं बेटा। वह रात में तो अक्सर गायब रहता है पर देर रात को घर वापस आ जाता है।”

“माँजी आप घबराइए नहीं। अगर रानू कल कल सुबह तक वापस नहीं आता है तो आप मिसिंग रिपोर्ट दर्ज करा दीजिएगा। वैसे रानू की क्या उम्र है ?”

“वह करीब 20 साल का है। वो मेरा बुढ़ापे का एकलौता सहारा है। अगर उसको कुछ हो गया तो मैं जीते जी मर जाऊंगी।”

“माँ जी सब ठीक हो जाएगा। चलिए आप कार में बैठिए मैं आपको घर तक छोड़ देता हूं।”अविनाश उस औरत को उसको घर छोड़ देता हैं और लौटते समय उसको अपना विजिटिंग कार्ड थमा देता है।

“माँ जी ये मेरा विजिटिंग कार्ड रख लीजिए। मैं पेशे से एक प्राइवेट जासूस हूं। यदि आपको कभी भी मेरी जरूरत होगी तो इस पर फोन कर लीजिएगा।” इसके बाद अविनाश, मनोज और राजू वापस अपने घर चले जाते हैं। दूसरा दिन उनका कुछ यूं ही गुजरता है। शाम को 7:00 बजे अविनाश को उसी वृद्ध महिला का फोन आता है।

“बेटा मैं मीरा बोल रही हूं। तुम्हारे कहे मुताबिक मैंने पुलिस थाने में अपने बेटे की मिसिंग रिपोर्ट दर्ज करा दी है लेकिन बेटा रानू अब तक घर वापस नहीं लौटा है। ऐसा उसने कभी नहीं किया है। अब तो मुझे बहुत ही चिंता हो रही है।”

अविनाश मीरा को दिलासा देते हुए बोला, “माँ जी मैं कल सुबह आपसे आपके घर मिलूंगा। देखता हूं मुझसे क्या हो पाता है।” इसके तुरंत बाद अविनाश इंस्पेक्टर मनोज को फोन लगा देता है।

“हेलो अविनाश, किसलिए फोन किया भाई ?”

“अरे भाई तुम्हारा हालचाल जानने के लिए फोन किया है।”

“तुम बिना मतलब के फोन नहीं करते। बताओ क्या बात है ?” इसके बाद अविनाश ने इंस्पेक्टर मनोज को रानू की माँ मीरा से हुयी सारी बातों से अवगत करा दिया।”

मनोज कहता है, “अब तू यह बता कि मुझसे क्या चाहता है ?”

“मैं चाहता हूं कि तू कल 10:00 बजे के आसपास सराय रानी पुलिस स्टेशन पर फोन करके कह दे कि वहां का इंस्पेक्टर थोड़ी मेरी मदद कर देगा। मिसिंग रिपोर्ट उसी के थाने मे दर्ज है।”

“मुझे पता है, इंस्पेक्टर कौशिक उस थाने का थानेदार है। मैं कह दूंगा कि आगे से मैं और तू ही इस केस को देखेंगे। मैं समय समय पर इंस्पेक्टर कौशिक को केस के प्रोग्रैस की जानकारी दे दूँगा। कल से तू इस केस पर काम करना शुरू कर दे।” दूसरे दिन अविनाश राजू के साथ सराय रानी थाने पहुंचता है। वहां का इंस्पेक्टर कौशिक उसके साथ बड़े अदब से पेश आता है।

“हेलो मिस्टर अविनाश गुड मॉर्निंग, मुझे इंस्पेक्टर मनोज ने आपके बारे में बता दिया था।आपको क्या जानना है?”

अविनाश ने पूछा, “कल इस इलाके की मीरा नाम की एक महिला ने अपने बेटे रानू की मिसिंग रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मैं जानना चाहता हूं कि इस केस में कोई प्रोग्रेस हुई की नहीं।”

कौशिक कहता है, “अब आप तो जानते ही हैं अविनाश जी,  नौजवान लड़का है। कहीं भाग गया होगा ? थोड़े दिनों बाद वापस आ जाएगा। वह पहले भी अक्सर रातों में गायब रहा करता था।”

“आपने उसके बारे में कुछ पूछताछ की है।”

“लगभग ना के बराबर। आप तो जानते ही हैं कि हम लोगों को इतनी फुर्सत तो मिलती नहीं। रानू इसी इलाके में एक रईस आदमी है सुबोध ठाकुर उसके फार्म हाउस का केयरटेकर था। या यूं कह लीजिए कि फॉर्म हाउस की देखभाल के साथ साथ सुबोध ठाकुर के लिए सुबह शाम का खाना बनाना,  उनके कपड़े धुलना, फार्महाउस की साफ-सफाई करना सब उसी के जिम्मे था। वो 8:00 बजे फॉर्म हाउस पहुंच जाता था और रात में करीब 8:00 बजे तक रहता था।”

अविनाश ने पूछा,-“ क्या आप लोग फॉर्म हाउस गए थे ?”

“हां कल शाम को हम लोग फार्म हाउस गए थे लेकिन फार्म हाउस पहले से ही बंद पड़ा हुआ है। आसपास से हमने पता किया तो लोगों ने बताया कि शायद सुबोध ठाकुर अपनी वाइफ के यहां मुंबई चला गया हो। मुझे लगता है कि रानू भी उसके साथ मुंबई घूमने चला गया होगा और गलती से अपना मोबाइल उसने अपनी माँ के पास ही छोड़ दिया होगा। जब मन भर जाएगा तो वापस चला आएगा। अभी तो फिलहाल हमारे पास इतनी ही जानकारी है।”

“कोई बात नहीं इंस्पेक्टर कौशिक आगे की तफतीश मैं और इंस्पेक्टर मनोज कर लेंगे। जानकारी देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद और हाँ बीच बीच मे मैं आपकी मदद लूँगा।”

“हाँ हाँ क्यों नहीं ? आखिरकार आप पुलिस डिपार्टमेंट की मदद ही कर रहें हैं।” अविनाश और राजू थाने से निकलकर रानू के घर की तरफ चले जाते है। रानू की माँ उनको देखते ही कुर्सी ले कर के बाहर आ जाती है। उसने इन दोनों को बिठाया और घर के अंदर थोड़ी देर बाद चाय और पानी ले कर के बाहर आ गई।

“आपको इतनी तकल्लुफ करने की जरूरत नहीं है। रानू अब तक घर वापस लौटा की नहीं।”

मीरा ने मायूसी से जवाब दिया,-“रानू 11 जून को रात करीब 10 बजे गया था। आज 14 जून है, उसके गायब होने का तीसरा दिन। मैंने पुलिस में शिकायत दर्ज की थी। वो तो वह कह रहे थे कि जवान लड़का है थोड़े दिनों में घूम फिर कर वापस चला आएगा। लेकिन बेटा न जाने क्यों मेरा मन बहुत घबरा रहा है ?”

अविनाश ने दिलासा देते हुए कहा, “देखिए माँ जी अभी मैं इंस्पेक्टर से मिलकर आ रहा हूं। आपके रानू को ढूंढने के लिए पुलिस जोर शोर से लगी है । अच्छा पहले कुछ मेरी कुछ बातों का जवाब दीजिए। सबसे पहले कुछ अपने बारे में बताइए।”

“मेरा नाम मीरा है। मेरे पति फौज से सूबेदार पद से रिटायर हुए थे। यह हमारा पुश्तैनी मकान है। इस गांव में थोड़ी सी हमारी खेती है। बाकी मेरे पति की पेंशन है और रानू के थोड़े पैसे से हमारा गुजारा आराम से हो जाता है। करीब 5 साल पहले मेरे पति की मृत्यु हो गई थी। 11 जून की रात करीब 9 बजे रानू घर वापस आया था और रात को करीब 10:00 बजे के आसपास दोबारा कहीं चला गया यह कहकर कि माँ देर रात तक वापस लौट आऊंगा पर अब तक नहीं लौटा।”

“उसने यह नहीं बताया कि कहाँ जा रहा है ?”

“बेटा मैं कभी कुछ उससे पूछती नहीं थी।”

“अच्छा आसपास उसके दोस्तों के बारे में मालूम है।”

“हाँ बेटा पास में ही उसका एक दोस्त है साहिल। साहिल ही उसका सबसे करीबी दोस्त है।”

“आपने साहिल से पूछताछ नहीं की।”

“की थी बेटा पर साहिल को कुछ भी नहीं पता है।”

“ठीक है माता जी हमें साहिल का पता दीजिए।” पता नोट करने के बाद बाद अविनाश और राजू उठकर के साहिल से मिलने चले गए। साहिल उस वक्त अपने घर में मौजूद होता है। अविनाश उसको अपना परिचय बताता है और कहता है कि हम तुम्हारे दोस्त रानू के बारे में कुछ पूछताछ करने आए हैं।

“आखरी बार तुम रानू से कब मिले थे ?”

“यही कोई 4 दिन पहले रात के करीब 10:00 बजे।”

अविनाश कहता है,-“मतलब 10जून को। गायब होने से एक दिन पहले।”

“हाँ।”

“कृपया जारी रखो।”

“हम अक्सर रात मे मिलते थे जब वह फार्म हाउस से खाली हो करके लौटता था।”

“तो 10 जून रात के बाद से तुम्हारी उससे मुलाकात नहीं हुई।”

“नहीं सर हमारी उससे मुलाकात नहीं हुई। बात दरअसल यह है कि मैं भी किसी काम में व्यस्त हो गया। जब उसकी माँ का फोन आया तब मुझे पता लगा कि वो पिछले तीन दिनों से वह घर नहीं लौटा है। मैं भी उसके बारे में काफी चिंतित हूं।”

“जब आखिरी बार तुम्हारी उससे मुलाकात हुई थी तो तुमने उसमे कोई व्यवहार मे कोई परिवर्तन नोट किया।”

“रानू मेरा सबसे करीबी दोस्त है फिर भी वो सारी बातें मुझसे साझा नहीं करता है।लेकिन उस दिन वो कुछ घबराया सा था। काफी गुमशुम भी था।”

“कैसी परेशानी थी ?”

“मैंने बहुत कोशिश की पूछने की पर उसने कुछ भी जवाब नहीं दिया और थोड़ी देर मे चला गया।”

“कहीं कोई लड़की का चक्कर तो नहीं।”

“जहां तक मुझे पता है उसका लड़की का कोई चक्कर नहीं था। वह बहुत ही सीधा साधा लड़का है।”

“सीधे साधे लड़के ही फँसते हैं इन सब चक्करों मे। अच्छा साहिल तुम अपना मोबाइल नंबर हमें नोट करा दो। ये मेरा विजिटिंग कार्ड है। यदि तुम्हें रानू के बारे में कोई भी जानकारी मिलती है तो मुझे तुरंत सूचना देना। क्योंकि जैसे जैसे दिन बीतता जाएगा वैसे वैसे मुश्किलें भी बढ़ती जाएंगी।”

“क्या सर आपको लगता है कि रानू के साथ कुछ अनहोनी हो गई है ?”

“अभी तो फिलहाल कुछ भी कह पाना मुश्किल है।”

“अच्छा एक आखरी सवाल मैं तुमसे पूछता हूं कि रानू जिसके यहां काम करता था, यहां के बड़े रईस लोगों में उसका नाम शुमार है। तुम सुबोध ठाकुर के बारे में कुछ जानते हो ?”

“नहीं सर मैं तो कुछ खास नहीं जानता सुबोध ठाकुर के बारे में। इतना जानता हूं कि रानू उन्हीं के यहां काम करता था। बाकी सुबोध ठाकुर के बगल वाला फार्महाउस उनके भाई सुशांत ठाकुर का है। दोनों भाइयों में आपस में बिल्कुल नहीं पटती है। वैसे भी सर जिनके पास बहुत पैसा होता है उनमें आपस में तकरार भी बहुत ज्यादा होती है। बस मुझे इतना ही पता है।”

“ठीक है। धन्यवाद।” इसके बाद अविनाश और राजू यहाँ से निकल कर सीध सुबोध ठाकुर के भाई सुशांत ठाकुर के फार्म हाउस पर पहुंचे। जिस समय वे पहुंचे सुशांत ठाकुर कहीं जाने की तैयारी कर रहा था। अविनाश ने सीधी अपनी होंडा सिटी कार फार्म हाउस के पोर्च के नीचे रोक दी। अविनाश और राजू ने घर में प्रवेश किया। उनको देखते ही सुशांत ठाकुर चौक करके पूछा आप लोग कौन है और मेरे घर में कैसे घुसे चले आए हैं।

अविनाश ने कहा, “माफ कीजिएगा। मुझे कैप्टन अविनाश कहते हैं और यह मेरे सहायक राजू। मैं पेशे से प्राइवेट डिटेक्टिव हूं। बात दरअसल यह है कि आपके बड़े भाई सुबोध ठाकुर के यहां एक केयरटेकर काम करता है रानू। रानू पिछले तीन दिन से लापता है। उसकी मां ने उसकी मिसिंग रिपोर्ट सराय रानी थाने में दर्ज कराई है। क्या आप रानू बारें मे कुछ जानते है ?”

सुशांत ठाकुर कहता है,-“देखिए रानू को मैं बहुत अच्छी तरीके से जानता हूं। वह एक निहायत ही अच्छा लड़का है। सुबोध के घर की देखभाल वही करता है। वो कहाँ गया है और क्यों नहीं आया है इसके बारे में मैं आपको कुछ नहीं बता सकता।”

अविनाश ने कहा, “आपके भाई सुबोध का भी फार्म हाउस लॉक है।”

“उसके बारे में भी मैं कुछ नहीं बता सकता।”

“अरे सुबोध आपके भाई हैं। बड़े भाई हैं। सगे भाई हैं। क्या आप नहीं बता सकते कि वह कहां गए हैं ?”

“इस वक्त यदि हमारा खून का रिश्ता नहीं होता तो मैं उसका खून कर देता।”

“अरे भाई अपने भाई से ऐसी भी क्या नाराजगी ?”

“वो भाई नहीं धोखेबाज है।पिताजी ने मरते वक़्त प्रॉपर्टी के दो हिस्से किए थे। लेकिन उसने सारी अच्छी जमीन हड़प ली और मुझे बंजर जमीन दे दी है। पिताजी के बहुत ढेर सारे पैसे भी उसने हड़प लिया। इन्ही सब बातों को लेकर के मैंने उसके अगेंस्ट कोर्ट मे केस भी कर रखा है। इसलिए वह कहां जाता है कहां आता है उसके बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं ?”

“अच्छा सुबोध ठाकुर के घर मे उनके अलावा कौन-कौन है।”

“वह यहां अकेले रहता है। उसकी पत्नी रीमा ठाकुर मुंबई में जॉब करती है। वह बहुत ही अच्छे नेचर की औरत है। मेरी भाभी होने के नाते मेरी उससे बीच-बीच में बात हो जाती है।”

“आप कभी-कभी उससे मिलने भी जाते हैं।”

“हां, जब कभी बिजनेस के सिलसिले में मुझे मुंबई जाना पड़ता है तो मैं उससे मिलने जाता हूं।”

“आपका किस चीज का बिजनेस है ?”

“वैसे तो हमारी खेती बहुत बड़ी है। हम लोग खेती बहुत लार्ज स्केल पर करते हैं। पर मेरा कुछ दवाइयों और केमिकल का कारोबार है। इसी सिलसिले में कभी-कभी मुंबई जाना पड़ता है।”

“अच्छा एक काम करिए आप मुझे अपना और अपनी भाभी रीमा का मोबाइल नंबर दीजिए। और रीमा का मुंबई का पता भी हमें नोट करा दीजिए। आपके भाई सुबोध और रानू कुछ दिन तक और नहीं लौटे तो हमें मुंबई जाकर रीमा से भी उनके बारें मे पूछताछ करनी होगी और कोई खास बात जो आप हमें बताना चाहते हो।”

“देखिये मैंने पहले ही आपसे बता दिया है कि मेरा मेरे भाई से कोई संबंध नहीं है।इसलिए वो कहां जाता है कहां आता है उसके संबंध किससे है मुझे इससे कोई मतलब नहीं है।

“ठीक है सुशांत जी बहुत-बहुत धन्यवाद।” सुशांत से मिलने के बाद अविनाश और राजू उसके घर से बाहर आते हैं।

अविनाश राजू से कहता है, “राजू आओ सुबोध के फार्म हाउस का एक बार चक्कर लगाते हैं। गेट खोल करके वो लोग ध्यान से लान मे चक्कर लगाते हैं।पीछली रात बारिश होने की वजह से लान की मिट्टी काफी गीली हो गई थी। इसलिए लान मे कोई भी निशान मिल पाना बहुत ही मुशकिल था। पूरी फार्म हाउस चारों तरफ से बंद था।”

राजू अविनाश से कहता है, “सर आसपास के दरवाजे और खिड़कियों में धक्का लगा कर देखें हो सकता है कुछ खुला हो। हो सकता है सुबोध कोई दरवाजा या खिड़की जल्दीबाजी में खुला छोड़ गया हो।”

“नहीं राजू, अभी किसी चीज को हाथ नहीं लगाना। हमें इन सब लिए इंस्पेक्टर मनोज को अपने साथ रखना होगा। अभी तो फिलहाल देखने में ऐसा ही लगता है कि सुबोध सब कुछ बंद करके कहीं चला गया है।” इसके बाद अविनाश और राजू इंस्पेक्टर मनोज से मिलने उसके थाने पहुंच गए।

मनोज बोला,-“और अविनाश कहां से आ रहे हो?”

“बस यार सराय रानी चला गया था।”

“रानू के बारे में कुछ पता चला।”

“कुछ खास नहीं। रानू 11 जून रात से अब तक लौटा नहीं। रानू का मालिक सुबोध का भी घर बंद पड़ा हुआ है। मैंने सुबोध का फोन नंबर ट्राई किया। उसका फोन नंबर स्विच ऑफ आ रहा है।”

“अविनाश अब तुम्हारा आगे का क्या प्लान है ?  पहले तो मैं सुबोध ठाकुर की पत्नी रीमा ठाकुर से मुंबई में मिलना चाहूंगा। हो सकता है उसको कुछ पता हो कि इस समय सुबोध ठाकुर कहां है ? सुबोध से ही हमें रानू के बारे में कोई जानकारी पता लग सकती है। और दूसरी बात कि सबके कॉल रिकार्ड्स को बड़ी बारीकी से चेक करना पड़ेगा।”

“ठीक है अविनाश तुम इस केस पर अनऑफिशियली काम करो। तुमको मेरी कहीं भी मदद चाहिए तो मैं हमेशा तैयार हूं।”

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“फिलहाल अभी मैं चलता हूं।” इसके बाद राजू और अविनाश वापस अपनी डिटेक्टिव एजेंसी आ गए। बेबी ने सीधे कॉफी ले करके रूम में प्रवेश किया। अविनाश ने अपना सिगार जला लिया और कॉफी की चुस्कियां लेने लगा।

चुप्पी को तोड़ते हुए बेबी ने अविनाश से पूछा, “क्या कोई पेचीदा केस हाथ लगा है ?”

“बेबी अभी तो यह कह पाना मुश्किल है। फिलहाल इस केस के बारे में मुझे जितनी जानकारी है तुम नोट कर लो।” उसके बाद अविनाश और राजू ने बेबी को इस केस के बारे में सारी जानकारियां नोट करा दी।

जानकारियां नोट करने के बाद बेबी ने अविनाश से कहा, “सर पता नहीं क्यों मुझे इस केस मे किसी भयानक साजिश की बू आ रही है।”

तब तक राजू ने तपाक से पूछा, “किस बात पर तुम ऐसा कह रही हो।”

“रानू भी गायब है। उसका मालिक सुबोध भी गायब है। सबसे खास बात है कि रानू का मोबाइल उसके घर पर ही पड़ा हुआ है। आज के जमाने में ये थोड़ा मुश्किल लगता है। लग रहा है कि जैसे वह जानबूझकर के मोबाइल घर छोड़कर गया हो। अगर वो किसी मुसीबत मे न होता तो अब तक अपनी माँ को किसी भी माध्यम सूचना दे दिया होता।”

“शायद बेबी तुम ठीक कह रही हो। राजू एक काम करो, चलो हम और तुम तुरंत मुंबई चलते हैं। देर रात वापस आ जाएंगे। बेबी तुम भी एजन्सि बंद करके घर चले जाना।”

रात को राजू और अविनाश रीमा के मुंबई वाले घर पर पहुंचते हैं। रीमा दरवाजे पर उन्हे देखकर आश्चर्य प्रकट करती है।

“माफ कीजिएगा मैंने आपको पहचाना नहीं।”

“देखिए मैं आज़मनगर से आया हूं। मुझे प्राइवेट डिटेक्टिव अविनाश कहते हैं। एक मिसिंग केस के सिलसिले में मैं आपसे कुछ बात करना चाहता हूं।”

“किसके मिसिंग केस के सिलसिले में ?”

“आपके हस्बैंड सुबोध ठाकुर का केयरटेकर रानू 11जून रात से गायब है और आज 14 जून है। वो अब तक घर नहीं लौटा है और आपके हस्बैंड का फॉर्म हाउस भी बंद है। क्या आप बता सकती हैं आपके पति कहां हैं ?”

“जहां तक मुझे याद है 7 जून से लेकर 11जून तक मेरी पति से बात हुई थी। हाँ उसके बाद नहीं हुयी है। वह इस समय कहां गए हैं यह मुझे नहीं पता है। मैं भी पिछले 2-3 दिनों से उनको फोन पर ट्राई कर रही हूं लेकिन उनका मोबाइल स्विच ऑफ जा रहा है।”

“लेकिन मुझे तो आपके चेहरे पर कोई चिंता नजर नहीं आती।”

“देखिए मेरे पति और मेरी एकदम नहीं पटती है। मुझे तो उनके सराय रानी फार्म हाउस गए हुए भी 6 महीने से ऊपर हो गया है। न तो वो मुझसे कुछ खास मतलब रखते हैं और ना मैं उनसे कुछ खास मतलब रखती हूँ।”

“7  जून से लेकर 11 जून तक आपकी आपके पति से क्या बात हो रही थी।”

“वह मुझे तलाक देना चाहते हैं।”

“तो क्या आप तलाक नहीं देना चाहती हैं।”

“तलाक मे मिलने वाली रकम देने के लिए वह मुझे तैयार नहीं है। इन सब बातों को लेकर के मैं काफी अपसेट थी। मैं ऑफिस भी नहीं गई थी। मैं अपने घर पर ही थी। आप चाहें तो पता कर सकते हैं।”

“आपके हस्बैंड का किसी औरत से चक्कर है।”

“मुझे नहीं पता है और मैं जानना भी नहीं चाहती।”

“आप क्या नौकरी करती हैं ?”

“मैं सिविल इंजीनियर हूं।”

“एक आखरी सवाल,  आपके देवर से हमारी बात हुई थी। वो आपकी बड़ी तारीफ कर रहा था।

“सुशांत ठाकुर एक बहुत ही अच्छा आदमी है। वो जब भी किसी बिजनेस के सिलसिले में मुंबई आता है तो वह मुझसे जरूर मिलता है। वो अपने भाई जैसा नहीं है। वो बहुत ही शांत और अंडरस्टेंडिंग है।”

 “देखिए रीमा जी ये एक पुलिस केस है। इसमें आप कुछ भी छुपाने की कोशिश मत करिएगा। ये मेरा विजिटिंग कार्ड रख लीजीए। रानू और सुबोध के बारे में कोई भी जानकारी मुझे मिले तो आप मुझे इस नंबर पर फोन करिएगा। मुझे यदि आपकी जरूरत हुई तो आपको आज़मनगर आना ही होगा। अब मैं चलता हूं।” पर अविनाश गेट से वापस आ गया।

“माफ कीजेएगा रीमा जी मुझे आपके पति के फार्म हाउस की चाबी चाहिए। वो क्या है कि फार्म हाउस लाक है और मैं पुलिस के साथ फार्म हाउस की तलाशी लेना चाहता हूँ।”

“हाँ हाँ क्यों नहीं। पर आप मुझे ये चाबी वापस कर दीजीएगा।”

“चाबी देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।” फार्म हाउस की चाबी लेकर अविनाश और राजू वापस आज़मनगर के लिए चल देते हैं। रास्ते में रुक कर के वह एक जगह खाना खाते हैं।

खाना खाने के दौरान राजू अविनाश से पूछता है, “सर कहाँ से शुरुआत करें ? यहां तो कुछ पता ही नहीं लग रहा है।”

“राजू एक काम करो, कल सुबह टेलीकॉम ऑफिस से सुबोध, सुशांत, रानू, रानू का दोस्त साहिल और सुशांत की बीवी रीमा का करीब पिछले 1 महीने का कॉल रिकॉर्ड निकलवाना। लगता है इसी से कुछ पता चलेगा।” इसके बाद वो दोबारा आज़मनगर के लिए रवाना हो जाते हैं। दूसरे दिन यानी 15 जून को करीब दोपहर के बाद राजू को सबके कॉल रिकार्ड्स मिल पाए। एजन्सि मे बैठकर अविनाश बेबी और राजू ने मिलकर सारे कॉल रिकॉर्ड का अध्ययन किया।

राजू ने अविनाश से कहा,-“7 जून से 11 जून तक रीमा की सुबोध से बातचीत हुयी है और सुबोध के नंबर पर एक कॉल और आयी है। और 11 जून के बाद सुबोध की किसी से कोई बात नहीं हुयी है। मुझे लगता है उसका फोन तभी से बंद है क्योंकि 11 जून के बाद सुबोध के फोन पर कोई कॉल नहीं है। रानू का भी फोन रिकॉर्ड बिल्कुल क्लियर है।”

“इसका मतलब राजू, रीमा सही बोल रही है।”

“लेकिन सर एक खास बात है। 7 जून से 11 जून तक रीमा और सुबोध मे आपस मे बातचीत हुयी है पर रानू की सुबोध से एक बार भी बात नहीं हुयी है।” 

तब तक बेबी ने कहा,-“हो सकता है 7 जून से 11 जून के दौरान सुबोध को कभी जरूरत ही नहीं महसूस हुई हो रानू से बात करने की।”

राजू ने कहा,-“ लेकिन सर केवल इन दिनो मे अचानक ऐसा क्या हो गया कि सुबोध को एक बार भी जरूरत महसूस नहीं हुई रानू से बात करने की जबकी 7 जून से पहले वो हर दिन ही रानू से बात करता है वो भी कई बार। आखिरकार रानू, सुबोध के फार्म हाउस का केयर टेकर है।”

“इस पे बाद मे गौर करेंगे। बाकी फोन रेकॉर्ड्स क्या कहते है ?”

राजू ने कहा, “सुशांत का भी फोन रिकॉर्ड बिलकुल साफ है। पिछले 30 दिनों में सुशांत ने सुबोध से कभी कोई बातचीत नहीं की है। अलबत्ता सुशांत ने रीमा ठाकुर से जरूर तीन चार बार बातें की हैं लेकिन वह कॉल मुश्किल से 1 या 2 मिनट की है और सर रानू के दोस्त साहिल की रानू से लगातार बात होती रही है और यह बात साहिल ने कबूला भी था कि उसकी रानू से अक्सर फोन पर बात होती है और वह रात में भी अक्सर मिलते हैं।” 

“इसका मतलब राजू, रीमा, सुशांत और साहिल भी शक के दायरे में फिलहाल नहीं है।”

तब तक बेबी बोली, “सर एक बात है, 7 जून से 11 जून के दौरान, रीमा के अलावा सुबोध को जिस नंबर से कॉल आई है उस नंबर से सुबोध की 7 जून से पहले भी लगातार बात हुई है। और ये कॉल अचानक 11 जून से सुबोध के नंबर पे आना बंद हो गई है।”

अविनाश ने कहा, “मतलब 7 जून से पहले सुबोध ने इस नंबर पर लगातार फोन किया है और इस नंबर पर लगातार फोन आया भी है। इस नंबर को नोट कर लो और यह पता करो कि यह नंबर किसका है। उसका एड्रेस वगैरा ले लो और कोई खास बात।”

“तब तक बेबी फिर बोली, “ रीमा की भी बात एक नंबर से लगातार हो रही है और उस नंबर पर भी फोन आ रहा है।”

“राजू यह नंबर भी नोट कर लो। इन दोनों नंबर के बारे में जानकारी हासिल करो।”

“लेकिन सर क्या आपको कुछ इसमें संदेहास्पद लग रहा है ?”

अविनाश बोला,-“एक दो बातें हैं जो मेरे मन को थोड़ा सा खटक रही है। सुबोध की रानू से लगातार बात होती रही है लेकिन 7जून के बाद इनमें कोई बातचीत नहीं हुई है। सुबोध की एक नंबर से और लगातार बात हो रही थी लेकिन 11जून के बाद उस नंबर से भी बातचीत बंद हो गई है क्योंकि 11जून के बाद सुबोध का फोन बंद आ रहा है। देखने से यह लगता है कि सुबोध इन दोनों के टच में सबसे ज्यादा रहा है।”

राजू बोला,-“ इसका मतलब सर यही लगाया जा सकता है कि 11जून के बाद सुबोध कहीं चला गया और अपना फोन बंद कर दिया।”

अविनाश बोला,-“लेकिन क्यों ? सुबोध का फोन 11 जून के बाद से बंद आ रहा है ? क्यों 7 जून से लेकर 11 जून तक उसने सिर्फ दो लोगों से बात की, एक रीमा और दूसरा नंबर जिसका हमें पता लगाना है। क्यों उसने 7 जून से 11 जून तक रानू से बात नहीं की जबकी रानू फार्म हाउस मे मौजूद था।और 11 जून के बाद न तो रानू का पता है और न ही उसके मालिक सुबोध का। राजू तुम एक बात का और पता लगाना कि सुबोध की मोबाइल की लोकेशन क्या थी खास करके उस समय जब उसने अपनी बीवी रीमा से बात की है। मेरा मतलब है 7-11 जून के दौरान।”

“ठीक है सर मैं पता लगाने की कोशिश करता हूं।” उसके बाद बेबी और राजू अपने-अपने काम में लग जाते हैं। रात को करीब 10:00 बजे राजू अविनाश के घर पहुंचता है।

“अरे राजू तुम इस समय।”

“अरे सर मैंने उन दोने नंबर का पता लगा लिया है।”

“अरे तो सुबह बता देते। तुम भी ना।

“सोचा कि रात में आपके साथ एक कप कॉफी पी जाए और इस केस पर थोड़ा सा डिस्कशन किया जाए।”

“चलो आओ टेरस पर चलते है।” अविनाश अपनी मां को कॉफी बनाने का ऑर्डर देकर टेरिस पर बैठ जाता है।

“राजू, क्या पता लगा ?”

“सर ,सुबोध की लगातार जिस नंबर पे बात होती रही है वह नंबर एक लड़की के नाम पर रजिस्टर्ड है। लड़की का नाम सोनाली है और वह सराय रानी में अपना एक ब्यूटी पार्लर चलाती है। पता भी उसने ब्यूटी पार्लर का ही दे रखा है।”

“और दूसरे के बारें मे बताओ।”

“सुबोध की बीवी रीमा की जिस नंबर से लगातार बात होती है उसका नाम अमन है। उसने मुंबई का पता दे रखा है। जिस समय सुबोध की अपनी पत्नी रीमा से बातचीत होती रही है मेरा मतलब है 7जून से 11 जून तक, उसके मोबाइल की लोकेशन उसके फॉर्म हाउस के आसपास की लोकेशन है।”

अविनाश ने कहा, “इसका मतलब मतलब 11 जून के बाद से रानू और उसका मालिक सुबोध एक साथ गायब हैं।”

“सर मुझे तो इस केस में कोई दम नजर नहीं आ रहा है। रानू और उसका मालिक सुबोध कहीं घूमने के लिए गए हैं और थोड़े दिनो मे वापस आ जाएंगे। हम बेकार मे अपना और पुलिस दोनों का समय नष्ट कर रहे है।” “मुझे सुबोध की चिंता नहीं है। मुझे चिंता हो रही है रानू की और उसके विधवा मां की।रानू बहुत ही सिंसियर लड़का है ये बात उसकी मां भी बोल रही थी और उसका दोस्त भी बोल रहा था।”

“तो सर आपका आगे क्या विचार है ?”

“चलो एक बार सराय रानी चलकर के पूछताछ कर लेते हैं। हमें जल्दी ही कुछ करना होगा।” राजू कॉफी पी कर के अपने घर चला जाता है। दूसरे दिन करीब 10:00 बजे अविनाश और राजू सराय रानी पहुंचते हैं। सबसे पहले वह रानू के दोस्त साहिल से मुलाकात करते हैं।

अविनाश साहिल से कहता है,-“क्या तुम्हारे दोस्त का कुछ पता चला ? उसके बारें मे कोई खबर मिली।”

“सर मुझे तो कुछ पता नहीं चला।”

“दोस्त के गायब होने में दोस्त का ही हाथ होता है। ऐसा अक्सर देखा गया है।”

“नहीं सर आप मेरा विश्वास मानिए। मेरा इसमें कोई हाथ नहीं है। रानू मेरा बहुत ही घनिष्ठ मित्र था।”

“था क्या मतलब ? क्या तुम्हें विश्वास है कि वह इस दुनिया में नहीं है।”

“अरे नहीं सर ऐसा मत बोलिए। वह तो मेरे जबान से फिसल गया था।”

“सच्चाई जबान से निकल ही जाती है। वैसे तुम चाहो तो हम पुलिस को मौका दे सकते हैं। तुमसे वो अपने ढंग से कबूल कारवा लेगी क्योंकि अभी तक पुलिस को भी कोई क्लू नहीं मिला है। और अब तक मुझे भी कोई क्लू नहीं मिला है।”

“सर इन सब में मुझको मत घसीटो।”

“अभी तो तुम कह रहे थे कि वह तुम्हारा घनिष्ठ मित्र है।लगता है तुम नहीं चाहते की वो वापस आए।”

“नहीं सर मैं दिल से चाहता हूँ कि वो सही सलामत वापस आ जाए।”

“तो जो कुछ भी रानू के बारें मे जानते हो साफ साफ बता दो।”

“सराय रानी बाजार में एक औरत है सोनाली। वो ब्यूटी पार्लर चलाती है। वह एक अच्छी औरत नहीं है। एक दो बार जेल में भी बंद हुई है।आसपास के लोग तो कहते हैं कि उसका सुबोध और सुशांत दोनों से चक्कर है। कभी-कभी सुबोध साहब की कार से रानू सोनाली को उसके फार्म हाउस में छोड़ जाता था। हाँ इतना ज़रूर है कि मैंने अक्सर सुबोध ठाकुर के छोटे भाई सुशांत को अकेले मे रानू से बात करते देखा है। पर उनके बीच क्या बात होती थी ये मुझे नहीं पता है, बस सर इससे ज्यादा मुझे कुछ नहीं पता है। और प्लीज सर सुबोध और सुशांत ठाकुर इस शहर के बहुत ही रईस आदमी है। उनको अगर इसकी ज़रा भी भनक लग गई कि मैंने आपको सोनाली के बारे में बताया है तो मैं मुश्किल में पड़ जाऊंगा। आपका क्या है आप तो पूछताछ के आज़मनगर वापस चले जाएंगे लेकिन मुझे तो यहीं रहना है।”

“तुम्हें कुछ नहीं होगा घबराओ नहीं। वैसे अच्छा किया जो तुमने मुझे यह बात बता दी।” इसके बाद अविनाश और राजू सराय रानी थाने पहुचते हैं। इंस्पेक्टर कौशिक बहुत गर्मजोशी से मिलता है।

उसने कहा, “इंस्पेक्टर मनोज से मेरी बात हुई थी वह आपकी बड़ी तारीफ कर रहे थे। आप परोक्ष रूप से पुलिस डिपार्टमेंट की बहुत ही मदद करते हैं। कुछ पता चला रानू बारे में।”

“नहीं अभी तो पता नहीं चला है लेकिन एक बात बताइए बाजार में सोनाली नाम की एक औरत का ब्यूटी पार्लर है। पता चला है कि वह एक दो बार थाने में तलब भी की गई थी।”

“आपने बिल्कुल सही सुना है। ब्यूटी पार्लर की आड़ में वो नशे का धंधा भी करती थी। इसी सिलसिले में पुलिस ने एक दो बार उसके ब्यूटी पार्लर में छापा भी मारा था। उसकी पहुंच बहुत ऊपर तक है। वो चरित्र से बहुत अच्छी नहीं है। पर ये किसी का व्यक्तिगत मामला है उसमें हम क्या कर सकते हैं ?”

अविनाश बोला,-“पर हम लोग उससे पूछताछ करने के लिए जाना चाहते हैं।”

“बिल्कुल चले जाइए। अगर आप चाहते हैं तो मैं भी चलूं।”

“नहीं, अभी आपको चलने की जरूरत नहीं है। अभी मैं काफी हूं। जरूरत होगी तो मैं बताऊंगा।” इसके बाद अविनाश और राजू सोनाली से पूछताछ करने के लिए उसके ब्यूटी पार्लर पहुंच जाते हैं।

औपचारिकता बाद अविनाश सोनाली से पूछता है, “सोनाली जी हम अभी-अभी थाने से आ रहे हैं।मुझे पता चला कि आप कभी नशे के धंधे में एक दो बार थाने में तलब हुयी है और अपने रसूख से आप बच भी गई हैं।”

सोनाली सकपकाते हुए बोली,-“पुलिस को गलतफहमी हो गई थी इसलिए वह मुझे पकड़कर ले गई थी।”अविनाश ने सोनाली को रानू की फोटो दिखायी।

“क्या आप इस लड़के को पहचानती हैं ?”

“हां हां क्यों नहीं? यह सुबोध ठाकुर के फार्म हाउस का केयरटेकर है। कितनी बार मुझे यह फॉर्म हाउस ले गया है। फॉर्म हाउस से छोड़ा है।”

“कैसा लड़का है रानू ?”

“निहायत ही शरीफ और सज्जन लड़का है।”“वो 11 जून की रात से लापता है और सुबोध ठाकुर का भी फोन भी 11जून से स्विच ऑफ आ रहा है। सुबोध भी अपने फॉर्म हाउस में मौजूद नहीं है।”

सोनाली ने कहा, “मैं भी उसका फोन ट्राई कर रही हूं लेकिन उनका फोन स्विच ऑफ जा रहा है।”

ये सुनकर अविनाश ने कहा,-“लेकिन आपकी बात सुबोध से करीब 7 जून से 11 जून के बीच हुयी है।

सोनाली ने कहा,-“नहीं, 7 जून से 11 जून के बीच मैंने उसे फोन किया था पर रानू ही सुबोध का मोबाइल उठा रहा था।। रानू बार बार यही कह रहा था कि सुबोध साहब कहीं बाहर गए हुए हैं और 11 जून के बाद से तो सुबोध का फोन बंद आ रहा है।”

अविनाश ने बोला,-“चलिये मान लेते हैं कि 7 जून के बाद से आपकी सुबोध से कोई बात नहीं हुयी है पर कॉल रिकॉर्ड से पता चला है कि आपकी सुबोध से काफी बातचीत होती है।”

“सुबोध मेरे काफी करीबी है।”

“क्या मैं जान सकता हूं कितना करीब है ?”

“अगर मैं फॉर्म हाउस में उनके यहां रात गुजरती हूं तो आपको समझ लेना चाहिए कि मैं कितनी करीब हूं।”

“ठीक है। एक बात पूछूं आप बुरा तो नहीं मानेंगी।

“पूछिये। वैसी भी मुझे कुछ बुरा नहीं लगता। लोगों को मुझसे दिक्कत होती है।”

“सुना है रात तो आप उनके छोटे भाई सुशांत ठाकुर के साथ भी गुजारती है।”

“सुशांत से पहले मेरा संबंध था लेकिन बाद में मेरा संबंध टूट गया।”

“क्यों कोई खास वजह ?”

“उन्होंने सुबोध के खिलाफ केस कर रखा है। मुझे यह बात बिल्कुल पसंद नहीं है। मैंने उनसे मेलजोल कम कर दिया है। ऐसा नहीं है कि मेरी उनसे बातचीत नहीं है।”

“ठीक है सोनाली जी पुलिस आप पर नजर रखे हुए हैं। अब मैं चलता हूं

“मुझे पता है पुलिस कहाँ नज़र रखती है ?” इसके बाद अविनाश और राजू अपने एजन्सि वापस चले आते हैं। आते ही बेबी ने पूछा,-“क्या हुआ सर कोई सफलता मिली ?”

“अभी तो हमने सिर्फ पूछताछ की है। मुझे रानू के गायब होने की कोई वजह समझ में नहीं आ रही है। अभी तक रानू नहीं मिल रहा है और अब यह सुबोध भी नहीं मिल रहा है। सुबोध की न तो अपने भाई से पटती है ना ही उसकी वाइफ से पटती है। शायद इसलिए किसी ने उसकी मिसिंग रिपोर्ट नहीं लिखवाई है। कहां से शुरुआत की जाए यह पता ही नहीं चल रहा है ?”

तब तक बेबी ने कहा,-“सर एक बात कहूं ऐसा तो नहीं कि रानू की हत्या हो गई हो और इसमें उसके मालिक सुबोध ठाकुर का हाथ हो और रानू की हत्या के बाद से सुबोध फरार हो गया हो ?”

“हत्या की कोई वजह ?”

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बेबी ने कहा,-“हो सकता है रानू का सोनाली से कोई संबंध हो गया हो क्योंकि राजू सोनाली को ले जाता और ले आता था या सुबोध ने कभी रानू को उसके छोटे भाई सुशांत से बात करते देख लिया हो और यह बात सुबोध को नागवार गुजरी हो और सुबोध रानू का मर्डर करके वह फरार हो गया हो क्योंकि अभी तक हम लोग सिर्फ गायब होने के बारें मे सोच रहें है जबकी हमें कत्ल की संभावना पर भी विचार करना चाहिए। रानू को गायब हुए काफी दिन हो आए हैं।”

तब तक राजू ने कहा, “यदि सुबोध ने रानू की हत्या की है तो उसकी लाश हमें मिलनी चाहिए।”

अविनाश बोल, “लाश तो सुबोध कहीं भी फेंक सकता है।”

राजू बोला, “लेकिन सर हमें कम से कम उस फार्म हाउस की तलाशी तो लेनी चाहिए। फार्म हाउस की चाबी आप सुबोध की वाइफ रीमा से ले करके ही आए हैं।”

“चलो ऐसा करके भी एक बार देख लेते हैं।”अविनाश इंस्पेक्टर मनोज को फोन मिला देता है।

“मनोज, यदि तुम इजाजत दो तो मैं सुबोध के फार्म हाउस की तलाशी लेना चाहूंगा।”

मनोज बोला, “अरे इसमें इजाजत की क्या बात है ?”

“लेकिन मैं चाहता हूं कि तुम स्निफर डॉग्स का इंतजाम कर दो। हम कुत्ते की मदद से तलाशी लेना चाहते हैं।”

“ठीक है इंतजाम हो जाएगा। कब आना है।

“हम शाम को करीब 5:00 बजे पहुंचेंगे। लेकिन तुम भी अपने दल बल के साथ मौजूद रहना।”

“ठीक है। मैं भी अपने दो कांस्टेबल और फोरेंसिक एक्सपेर्ट के साथ फॉर्म हाउस पर ठीक शाम को 5:00 बजे उपस्थित रहूँगा।” शाम को 5 बजे अविनाश और राजू फॉर्म हाउस पहुंच जाते हैं। थोड़ी देर बाद इंस्पेक्टर मनोज भी अपने दो कांस्टेबल और फोरेंसिक एक्सपर्ट के साथ पहुंच जाता है। सबसे पहले अविनाश फोरेंसिक एक्सपर्ट से कहता है कि वह दरवाजे और खिड़कियों पर से निशान उठाने की कोशिश करें। और इसी बीच अविनाश, इंस्पेक्टर मनोज और राजू स्निफर डॉग के साथ फार्म हाउस के चारों तरफ लान का चक्कर लगाने लगते हैं। बिल्डिंग के ठीक पीछे पेड़ के नीचे खड़े होकर के डॉग भोंकने लगता है।

अविनाश कहता है,-“मुझे लगता है मनोज की यहां कुछ है ?” इंस्पेक्टर मनोज तुरंत अपने कांस्टेबल को वहाँ खुदाई करने का आदेश देता है।करीब 5 फीट खोदने के बाद उनको एक लाश दिखाई देती है। उसकी कद काठी और उम्र वही लगती है जो करीब करीब रानू की थी।

“लाश सड़ गई है पर फिर भी मुझे लगता है की यह लाश रानू की है। उसके बदन पर नाइट सूट है जैसा की रानू की माँ ने बयान मे कहा था। मनोज तुरंत इस लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दीजिए और इसकी माँ और उसके दोस्त साहिल को भी सूचना भिजवा दीजिए कि वह थाने में आकर के कल सुबह डेड बॉडी ले ले।”

थोड़ी देर में फॉरेंसिक एक्सपोर्ट्स आ करके अविनाश से कहता है कि सर पूरे घर में कहीं निशान नहीं है। लगता है किसी ने अच्छी तरीके से सफाई की है। और जो निशान हमें मिले भी हैं वह भी काफी घुलमिल गए हैं।

“ठीक है। आओ मनोज घर की एक बार तलाशी ले लेते हैं।” लेकिन उन्हें वहां घर की तलाशी में कुछ नहीं मिलता है।

इंस्पेक्टर मनोज बोलता है, “मुझे तो लगता है अविनाश, सुबोध अपनी कार के साथ फरार है। देखो उसकी कार भी कहीं नजर आ रही है। 11 जून से सुबोध का फोन भी स्विच ऑफ जा रहा था।एक का कत्ल हो गया और दूसरा फरार है।”

अविनाश ने कहा, “यह संभावना भी हो सकती है। मैं सोचता हूं कि चलने से पहले एक बार रानू के रूम की तलाशी ले ली जाए अब जब उसका कत्ल हो गया है तो।” रानू की मौत की खबर उसकी माँ तक पहुच चुकी थी। उसकी मां इस सदमे से बेहोश थी। थोड़े ही समय में अविनाश रानू के रूम की तलाशी ले कर के वापस आ जाता है। वे सब लोग रानू के घर से वापस चले आते हैं।

रास्ते में मनोज अविनाश से पूछता है,-“अविनाश आपको रानू के रूम से तलाशी के दौरान कुछ मिला या नहीं।”

“सिर्फ दो चीजें मिली। एक उसका मोबाइल मिला और दूसरा फार्म हाउस की चाबी मिली क्योंकि रानू उसका केयरटेकर था इसलिए चाबी होना उसके पास स्वभाविक है। लेकिन यह दोनों ही चीजें हमारे लिए कोई मायने नहीं रखती हैं। चलिए वापस चलते हैं। सुबह आप हमें पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बारे में बता दीजिएगा और डेड बॉडी रानू की माँ को सौंप दीजिएगा।” इस्पेक्टर मनोज को छोड़कर अविनाश और राजू आगे रवाना हो जाते हैं।

 “राजू एक संभावना है कि कहीं ऐसा तो नहीं की सोनाली को ले जाते ले आते रानू का संबंध सोनाली से हो गया हो और इसी गुस्से में सुबोध ने रानू का कत्ल कर दिया हो। हालांकि बात कुछ जम नहीं रही है।”

“लेकिन सर सोनाली के संबंध तो उसके छोटे भाई सुशांत से भी है।”

“राजू कातिल हम क्या खाक ढूढ़ेंगे अभी तो हमें कत्ल का मकसद ही नहीं पता है। चलो कल देखते हैं कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या निकलता है ?” “लेकिन सर कम से कम फार्म हाउस की तलाशी लेने से हमें रानू की लाश तो बरामद हो गई, नहीं तो अभी तक हम यही माने पड़े थे कि रानू सुबोध के साथ कहीं भाग गया है।”

“राजू सारी पिक्चर समझ में आ आएगी अगर यह सुबोध मिल जाए तो।”

“चलो राजू अभी घर चलते हैं। कल पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद से इस केस को नए नजरिए से देखेंगे।” दूसरे दिन करीब 12:00 बजे इंस्पेक्टर मनोज ने अविनाश को फोन करके पोस्टमार्टम रिपोर्ट की जानकारी दी।

“मनोज, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या मिला है?”

“जिस समय रानू की हत्या हुई उस समय उसने बहुत ही ज्यादा शराब पी रखी थी और नशे में उसकी दम घुटने से मौत हो गई। ऐसा मालूम पड़ता है कि किसी ने नशे की हालत में मुंह और नाक पर कुछ रख दिया था। जैसे कोई तकिया हो या तौलिया हो और दम घुटने से उसकी मौत हो गई।”

“मौत का समय और दिन क्या था ?”

“11 जून को करीब रात के 11:00 बजे के आस पास।”

“अच्छा बहुत-बहुत धन्यवाद।” उसके बाद अविनाश ने बेबी और राजू को अपने केबिन में बुला लिया और उन्हें भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बारे में जानकारी दी।

बेबी ने कहा,-“लेकिन सर पोस्टमार्टम रिपोर्ट से तो कुछ भी जाहिर नहीं होता है। नशे की हालत में रानू की दम घुटने से मौत हो गई।”

तब तक राजू बोला,-“ सर मैं इसमें कुछ बोलूं।”

“हां राजू बोलो। हो सकता है कि रानू की हत्या करने के बाद मेरा मतलब है 11 जून के बाद सुबोध ठाकुर फरार हो गया पर सर आप सोचो क्या सुबोध इतना बेककूफ है कि वो रानू की लाश को अपने फार्म हाउस के लान मे गाड़ेगा ? वो रानू की लाश को कहीं भी फेंक सकता है।” बेबी बोली,-“राजू ऐसा भी तो हो सकता है कि उसने रानू की हत्या खुद न की हो किसी से करवाई हो।”

“जो भी बात हो पर वो किसी भी सूरत मे लाश को अपने लान मे गाड़ने का खतरा नहीं लेगा।” अविनाश बोला,-“बेबी मुझे राजू की बात मे दम नज़र आ रहा है।”

बेबी बोली,-“सर कहीं ऐसा तो नहीं कि रानू की तरह सुबोध की भी किसी ने हत्या कर दी हो और हम गलत दिशा मे भटक रहें हो।”

राजू,-“क्या बात है बेबी आज कल बड़े सुझाव दे रही हो।” “अरे ये सर की संगति का असर है।”

अविनाश बोला,-“अच्छा बेबी चलो तुम्हारी बात मान लेते हैं कि सुबोध ठाकुर की भी हत्या हुयी है। उसकी हत्या से सबसे ज्यादा फायदा किसको पहुंचेगा।”

राजू ने कहा,-“जहां तक मेरा ख्याल है सर, सबसे ज्यादा फायदा उसकी बीवी रीमा को पहुंचेगा। उसके बाद सारे जायदाद की मालकिन वह हो जाएगी। दूसरा उसके छोटे भाई सुशांत ठाकुर को पहुंचेगा।”

“और सोनाली के बारे में तुम लोगों का क्या विचार है ?”

बेबी बोली,-“सोनाली बाजारू किस्म की औरत है। सुबोध के मरने में उसे क्या फायदा हो सकता है ? मेरे ख्याल से सुबोध के जीवित रहने मे उसका फायदा है।”

“लेकिन तुम एक बात भूल रहे हो कि उसके नाजायज संबंध सुबोध से ही नहीं है। उसके संबंध और लोगों से भी हैं। हो सकता है यह औरत के चक्कर में हत्या हो। आज कल ज्यादा यही सुनने मे आता है। यदि सुबोध ठाकुर की हत्या हुई है तो तुम सोनाली को भी अपने शक के दायरे से बाहर नहीं कर सकते। हाँ तुम्हारी यह बात सही है कि अभी हमें सीधे सोनाली को फायदा होता दिखाई नहीं दे रहा है।”

बेबी बोली,-“ सर सुबोध बहुत पैसे वाला आदमी है। कहीं इस पैसे के चक्कर मे तो उसकी हत्या नहीं हो गई।”

अविनाश बोला,-“एक काम करते हैं इस्पेक्टर मनोज की मदद से हम सब के पिछले एक महीने के अकाउंट डिटेल को चेक करते है।”

बेबी बोली,-“यह काम हमको पहले कर लेना चाहिए था।” अविनाश तुरंत इंस्पेक्टर मनोज को फोन लगाता है।

“मुझे तुम्हारी मदद चाहिए। मैं चाहता हूं कि इस केस में जितने भी लोग इन्वॉल्व हैं सुबोध, सुशांत, रीमा रानू, साहिल और सोनाली सभी के पिछले एक महीने की बैंक ट्रांजेक्शन डिटेल मिले।”

“मैं कोशिश करता हूं।”

“जितनी जल्दी रिपोर्ट मिल जाए उतना अच्छा रहेगा।” फोन रखने के बाद से अविनाश तुरंत फोन रीमा को मिला देता है।

“रीमा जी आपके कॉल रिकार्ड्स में एक नंबर है अमन का। अमन जिससे आप की लगातार बात होती है। आप बताने का कष्ट करेंगी की अमन कौन है ?

“अमन मेरा बॉयफ्रेंड है। अमन ही मेरा सब कुछ है। आपको पता लग गया कि मैं और खुलकर बताऊं।”

“नहीं अब आपको और बताने की जरूरत नहीं है। अमन क्या काम करता है ?”

“उसका अपना मोटर गैराज है। उसके पास सुबोध इतना पैसा तो नहीं है लेकिन वह मुझे प्यार देता है, इज्जत देता है। मैं अमन के साथ ही रहूंगी। सुबोध मुझे तलाक दे या ना दे।”

“आपको सुबोध की कोई खबर मिली।”

“न ही मैं जानती हूं और ना मैं जानना चाहती हूं।”

“आपको पता है रीमा जी कि आपके पति के केयरटेकर रानू की लाश आपके फार्म हाउस से ही बरामद हुई है।”

“नहीं। मैं तो आपके ही मुंह से सुन रही हूं।”

“क्या लगता है कि किसने रानू का कत्ल किया होगा ?”

“मुझे क्या पता रानू का कत्ल किसने किया होगा। यह पता लगाना आपका काम है। पता लगाइए।”

“वह तो हम पता लगा ही लेंगे। फिलहाल यदि सुबोध की कोई खबर मिले तो हमें तुरंत फोन कीजिएगा।” फोन रखने के बाद अविनाश सोच में पड़ जाता है।

“कुछ भी कहो राजू, कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है। कोई क्लू नहीं मिल रहा है। राजू बेबी तुम लोग जाओ। बैंक अकाउंट डिटेल आने के बाद फिर कुछ सोचते हैं।” दोनों के जाने के बाद अविनाश आंख बंद कुछ सोचने लगता है। आखिर में सुबोध कहां गया ? कहीं वाकई उसकी भी हत्या………

इसके इसके बाद अविनाश उठकर के इंस्पेक्टर मनोज के पास चला जाता है।

“क्या हुआ अविनाश यहां कैसे ?

“जब तक हमें सुबोध का पता नहीं लगेगा बहुत ही मुश्किल है कि हम यह पता लगा सके कि रानू की हत्या किसने की। सुबोध काफी दिन से गायब है पर उसकी चिंता ना उसके भाई को है ना उसकी चिंता उसके बीवी को है ना उसकी चिंता उसके प्रेमिका को है। मनोज, मैं चाहता हूं कि सराय रानी से लेकर के आजमनगर तक के आसपास तुम पता करवाओ कि क्या कहीं कोई लाश बरामद हुई है या कार दिखाई दी है।”

“ठीक है, मैं अभी अपने कुछ खबरियों को इस काम पर लगा देता हूं।और कल तक तुम्हें सबकी अकाउंट डिटेल्स भी मिल जाएगी।” इसके बाद अविनाश उठकर अपने घर चला जाता है और शांति से इस केस के बारे में मंथन करता है। दूसरे दिन करीब लंच बाद उसे अकाउंट डिटेल फैक्स पर मिलती है। वो बेबी और राजू तीनों बड़ी बारीकी से अकाउंट डिटेल देखने लगते हैं। बेबी कहती है,-“सर एक जून को रात को करीब 2:00 बजे रानू ने आजमनगर के बलरामपुर इलाके से एटीएम से पैसे विड्रॉल किए हैं। सर आपने बताया था कि बीच-बीच में रानू रात में कहीं गायब हो जाता था। कहीं ऐसा तो नहीं कि वह आजमनगर आता था।”

अविनाश कहता है,-“बेबी यह तो तुमने बड़ी अहम बात नोट की है। बलरामपुर एरिया में सिर्फ होटल हैं। रात को 2:00 बजे उसने एटीएम से पैसे निकाले हैं तो वह जरूर किसी होटल में जाता होगा। इसकी ज्यादा संभावना है।”

“राजू, तुम रानू की तस्वीर लेकर जाओ और पता लगाओ कि क्या वो कभी किसी होटल में आता था।” उसके बाद बेबी और राजू तुरंत बलरामपुर को चल दिये।

थोड़ी देर बाद बेबी और राजू बलरामपुर पहुंचते हैं। होटल सर्च करने पर एक होटल का मैनेजर रानू को पहचान लेता है। होटल का मैनेजर कहता है कि रानू उनके होटल में अक्सर आता है। राजू मैनेजर से 1जून की सीसीटीवी फुटेज मांगता है। उस फुटेज में देखने पर यह पता चलता है कि रानू के साथ उस वक्त सोनाली ने होटल में इंटर किया था। तुरंत राजू और बेबी वापस चले आते हैं और अविनाश को सीसीटीवी के बारे में बताते हैं। अविनाश कहता है,-“एक बात बताओ राजू, रानू सिर्फ सोनाली के साथ ही उस होटल मे जाता था या कोई और लड़की के साथ भी जाता था।”

“सर इस बात पर तो मैंने ध्यान ही नहीं दिया। हमको तो जैसे ही सोनाली सीसीटीवी मे दिखी हम खुशी से सीधे वापस चले आए।”

“हो सकता है कि रानू की हत्या में सोनाली के अलावा किसी और लड़की का भी हाथ हो। ऐसा करो जहां तक संभव हो पिछले एक महीने के सीसीटीवी रिकॉर्ड तुम होटल से ले लो। होटल का मालिक कोई दिक्कत करे तो मैं अभी इंस्पेक्टर मनोज को फोन कर देता हूं। तुरंत जाओ और तुरंत सीसीटीवी फुटेज ले कर के वापस आओ। राजू थोड़ी देर मे दोबारा वापस आ जाता है। फिर वो तीनों मिलकर अपनी साईं डिटेक्टिव एजेंसी में फुटेज को खंगालने लगते हैं। सीसीटीवी रेकॉर्ड देखने से ये पता चलता है कि सोनाली के साथ बीच-बीच में रानू, सुबोध ठाकुर की पत्नी रीमा के साथ भी होटल में रात बिताने गया है। बेबी बोलती है,-“ सर यह रानू तो बहुत पहुंचा हुआ निकला। मुझे लगता है सर लड़कियों के शौक ने ही इसकी जान ले ली।”

तब तक राजू बोला,-“ सर इसमें कोई भी शक नहीं है की सुबोध ने गुस्से में रानू की हत्या कर दी और अपनी कार लेकर फरार हो गया है। जब मामला थोड़ा ठंडा हो जाएगा तो वह वापस आकर सरैंडर कर देगा। और वैसे भी रानू की हत्या का सबूत तो अभी हमारे पास कुछ खास है नहीं। सिर्फ हमारे पास मकसद है।”

“अगर हमें मकसद का पता चल जाता है तो सबूत तो खुद ब खुद मिल जाएंगे। सबसे पहले सोनाली और रीमा से बात करके देखते है।” अविनाश तुरंत सोनाली को फोन लगा देता है।

“हेलो सोनाली जी, मैं प्राइवेट डिटेक्टिव अविनाश बोल रहा हूं। पहचाना मुझे।”

“अरे आप को कैसे भूल सकती हूं। और बताइए अविनाश साहब कैसे हैं ? कुछ ख़बर लगी सुबोध की।”

“नहीं सुबोध के बारे में तो खबर नहीं लगी है लेकिन रानू से आपकी यारी के बारे में ख़बर लगी।”

“मैं कुछ समझी नहीं। पता लगा है कि आप रानू के साथ होटल में काफी रात बिताती थी।”

“किसी के साथ होटल में रात बिताना क्या चोरी है ?”

“चोरी तो नहीं है लेकिन किसी भी इंफॉर्मेशन को छुपाना गैर कानूनी है। रानू की हत्या हो गई। उसकी लाश भी मिल गई। और आपने हमें बताना एक बार भी जरूरी नहीं समझा कि आप उसके साथ होटल में जाकर रंगरेलियां मनाती थी।”

“मैंने यह बात जरूरी नहीं समझी।”

“आपको किस बात का डर था। आप की कोई इज्जत तो समाज में है नहीं।”

“देखिए आप मेरी बेइज्जती कर रहे हैं।”

“मैडम सोनाली आपको जितना पता है बता दीजिए। मुझे पता है कि आपको सुबोध ठाकुर के बारे में पता है कि वह कहां है? वैसे पुलिस अपने ढंग से इन चीजों को कबूलवा लेगी।”

“मैं आपको सही बताती हूं। माना की मुझसे गलती हो गई है कि रानू के संबंध को मैंने आपसे छुपाया है क्योंकि मैं नहीं चाहती थी कि मेरे इन संबंध के बारे में किसी को पता चले और खास करके सुबोध को। मैं आपसे सच बता रही हूं मुझे सुबोध के बारे में कुछ भी नहीं पता है। मुझे रानू की हत्या के बारें मे भी कुछ पता नहीं है।”

“सोनाली, अभी मैं फोन रखता हूं। कोई भी इंफॉर्मेशन आपको मिले तो आप मुझे तुरंत फोन करिएगा।” इसके बाद तुरंत अविनाश रीमा को फोन लगा देता है।

“हेलो रीमा जी कैसी हैं ?”

“मैं ठीक हूं। कैसे याद किया मुझे ?”

“मैं देख रहा हूं कि इतने दिनों से आपके हस्बैंड गायब है और आपको उनकी कोई फिक्र नहीं है।”

“मुझे क्यों उनकी फिक्र होने लगी ? वैसे भी उनके चाहने वाले बहुत हैं।”

“लेकिन उनका एक चाहने वाला तो मर चुका है। कहीं ऐसा तो नहीं रानू की हत्या आपने ही की है।”

“मैं रानू की हत्या क्यों करने लगी।”

“हो सकता है रानू आप को ब्लैकमेल कर रहा हो ? आप उसके साथ होटल में रात बिताती थी।”

“यह आप क्या कह रहे हैं ?”

“मैडम मेरे पास सीसीटीवी फुटेज है। आप पिछले काफी दिनो से उससे होटल मिलने गई है। अंतिम बार आप उससे मिलने 6 जून को गई थी। अब हमें यह बताइए कि आप उससे होटल मिलने क्यों जाती थी ? आपके और रानू के बीच क्या पक रहा था।”

“यह बात सही है कि मैं रानू के साथ होटल में रात बिताने जाती थी। लेकिन सिर्फ इसलिए मैं रानू को पसंद करती थी।”

“पर आपका बॉयफ्रेंड तो अमन है।”

“देखिए अमन से मेरी यारी तो अभी 3 महीने पहले हुयी हैं। रानू से मेरे जिस्मानी संबंध काफी पहले से हैं। पिछले साल जब मैं सुबोध के फार्महाउस रहने गई थी उसी समय से हमारे रानू से संबंध हो गए थे। मेरे सुबोध से कोई खास संबंध नहीं थे।”

“कहीं ऐसा तो नहीं रीमा जी कि सुबोध को आपके और रानू के संबंध की भनक लग गई हो उसने गुस्से में आकर रानू की हत्या कर दी हो।”

“आप शायद बिल्कुल ठीक कह रहे हैं।ऐसा हो सकता है कि उसको मेरे और रानू के संबंधों के बारे में पता लग गया हो और वो रानू की हत्या करके भाग गया हो।पर मुझे इसकी कोई परवाह नहीं है।वैसे भी मुझे उसके साथ नहीं रहना है लिहाजा मेरे किससे संबंध हो उससे क्या मतलब? आप सुबोध को ढूंढने की कोशिश कीजिए। रानू की हत्या की सारी गुत्थी खुद-ब-खुद सुलझ जाएगी।और मुझे उससे तलाक भी चाहिए।”

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“आप मुझे सलाह मत दीजिए की मुझे क्या करना है?अभी मैं फोन रखता हूं लेकिन जैसे सुबोध की हमें कोई खबर मिले आप हमें तुरंत इत्तला करेंगी।”

राजू कहता है सर,-“अपने सुबोध के छोटे भाई सुशांत को बड़ा इग्नोर किए हुआ हैं। यह भी तो हो सकता है कि सोनाली के चक्कर में उसी ने रानू को मार दिया हो।”

“लेकिन क्यों ?”

“सर यह भी तो हो सकता है कि सुशांत ने रानू का मर्डर कर दिया हो और सुबोध को फसाने के लिए लाश उसके लॉन में गाड़ दी हो।”“इस बात में भी दम है। हमारे पास सुशांत के खिलाफ भी तो कोई सबूत नहीं है। लाश तो उसके लान से बरामद हुई नहीं है। कुछ भी समझ मे नहीं आ रहा है।” अविनाश कुछ देरी विचार करता है और इंस्पेक्टर मनोज को फोन लगा देता है और सारी बातों के बारे में उसको जानकारी दे देता है।

“अविनाश तुम्हारे कहने के हिसाब से मैंने सुबोध और उसके कार की खोज आसपास की पर उसका कोई भी नामोनिशान हमें नहीं मिल रहा है।”

“जब तक सुबोध पकड़ा नहीं जाएगा तब तक रानू की हत्या की गुत्थी हल नहीं होगी।एक बार मैं सुबोध के फॉर्म हाउस की तलाशी फिर से लेना चाहता हूँ। शायद कुछ मिल जाए।”

“ठीक है जैसा तुम ठीक समझो और कोई जरूरत होगी तो मुझे फोन कर देना।” इसके तुरंत बाद अविनाश अपनी कार से सीधे सराय रानी सुबोध ठाकुर के फार्म हाउस पहुंच गया। वह गेट खोल कर के अंदर गया। साफ सफाई ना होने के कारण वहाँ काफी खर पतवार, घास फूस इकट्ठा हो गई थी।वो पूरे लान की बड़ी बारीकी से तलाशी करने लगा। तलाशी करते-करते वह वहां पर पहुंच गया जहां पर रानू की लाश मिली थी। चारों तरफ बारीकी से देखने उसे एक एटीएम स्लिप लान मे गिरी दिखाई दी। उसने उसको खोलकर देखा और उसने तुरंत राजू को फोन लगाया।

राजू तुम एक बात बताओ, 1जून को रात में करीब 2:00 बजे रानू ने 4000 रुपये निकाले थे। क्या ये सही है ?”

राजू ने कहा,-“हाँ सर। इसके बारें मे आपको पहले से पता है।”

“मैं तो बस ज़रा कंफर्म कर रहा था कि यहां पर जो एटीएम स्लिप मुझे मिली है वही एटीएम स्लिप है या नहीं। यह बात सही है कि यह वही एटीएम स्लिप है। लेकिन यहाँ कैसे गिरी है वो भी रानू के लाश के पास।” अविनाश ने 2 मिनट सोचा और तुरंत इंस्पेक्टर मनोज को फोन लगा दिया। “मनोज ऐसा करो अपने 4 कांस्टेबल के साथ फार्म हाउस पहुंच जाओ।”

“क्यों क्या हुआ ? कोई खास बात।”

“बस तुम तुरंत चले आओ।” तुरंत ही मनोज अपने 4 कांस्टेबल के साथ पहुंच जाता है।

“अविनाश भाई मुझे 4 कांस्टेबल के साथ किस लिए बुलाया है।”

“एक काम करो जिस जगह हमें रानू की लाश मिली थी, अपने कांस्टेबल से कहो कि उसी जगह खुदाई करनी शुरू करें।” करीब उन्होंने 10 फीट गड्ढा खोद दिया पर उन्हे कुछ नहीं मिला। मनोज ने अविनाश के पूछा कि आगे क्या करना है। यहाँ कुछ मिल ही नहीं रहा है।

अविनाश बोला,-“ऐसा करो 5 फीट और खोदो।” करीब 5 फीट खोदने के बाद से उन्हें एक लाश मिली। लाश को बाहर निकाला गया। लाश काफी सड़ गई थी।

अविनाश ने कहा,-“मनोज मुझे उम्मीद है कि यह सुबोध ठाकुर की लाश है।”

एक कांस्टेबल ने कहां,-“ सर हमें लाश के साथ तीन और चीजें बरामद हुई है।एक तो छोटी काँच की बॉटल है और दूसरा एक जोड़ी सफ़ेद दस्ताने और लाश की पैंट की जेब से एक चाबी।”अविनाश ने कहा,-“ मनोज बॉटल और दस्ताने पर से फिंगरप्रिंट्स निकलवाने की कोशिश करो और यह भी पता लगाओ कि इस बोतल में क्या है ? देखने से तो लग रहा है कि पोटेशियम साइनाइड है। और सुबोध की लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दो। हमें एक चाबी भी बरामद हुई है। यह इससे फार्म हाउस की चाबी लगती है। फिर भी मैं एक बार खोल कर चेक कर लेता हूं।” वो फार्म हाउस की ही चाबी निकली और चाबी के छल्ले पर ST भी लिखा हुआ था।

“इसका मतलब अविनाश यह सुबोध ठाकुर के फार्म हाउस की चाबी है।”

“ठीक है मनोज यह चाबी तुम अपने पास रख लो। और एक काम करो कि कल सुबह 10:00 बजे के आसपास सुबोध ठाकुर के भाई सुशांत ठाकुर, रानू का दोस्त साहिल, सुबोध ठाकुर की प्रेमिका सोनाली, उसकी बीवी रीमा और रीमा का बॉयफ्रेंड अमन को कल 10:00 बजे थाने बुला लो।और सबके फिंगर प्रिंट लेकर दस्ताने और बोतल पर मिले फिंगर प्रिंट से मिलवा लेना।”

“क्या तुम्हें कातिल पता लग गया ?”

“कातिल का पता नहीं लगा है। पहले पोस्टमार्टम तो आ जाने दो। मैं तुम लोगों से 11 बजे थाने मे मिलूंगा।”

“लेकिन इतने लोगों को इकट्ठा क्यों कर रहे हो? कभी-कभी साथ साथ बयान लेने से भी काफी चीजें निकल कर के सामने आती हैं।” उसके बाद अविनाश वापस अपने घर चला जाता है। वो फोन करके राजू और बेबी को भी थाने 11:00 बजे बुला लेता है।सुबह 11:00 बजे सब लोग इंस्पेक्टर मनोज के थाने में उपस्थित रहते हैं।मनोज अविनाश को पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फिंगर प्रिंट रिपोर्ट देता है।अविनाश पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फिंगरप्रिंट रिपोर्ट बड़े ही ध्यान से पढ़ता है।

पढ़ने के बाद वो सबसे पहले रीमा की तरफ मुखातिब होता है,-“ रीमा जी मुझे आपके हस्बैंड के कत्ल का बहुत दुख है।” रीमा बोली,-“मैं सुबोध से तलाक लेना चाहती थी पर मेरी कभी ऐसी मंशा नहीं थी कि सुबोध का कत्ल हो जाए। कल रात से मैं काफी सदमे में हूं। हालांकि हमारे उनके संबंध कभी अच्छे नहीं रहे।”

तब तक सुशांत भी बोलता है,-“ हां सर मैं भी यही कहना चाहता हूं कि मेरे भैया से रिलेशन कभी बहुत अच्छे नहीं थे लेकिन फिर भी मैं कभी यह नहीं चाहता था सुबोध इस दुनिया से चला जाए।”

अविनाश ने सिगार जलाते हुए कहा,-“आखिर सुबोध और रानू की हत्या किसने की है? रीमा जी आपको यह जान करके हैरानी होगी कि आपके पति की हत्या रानू ने की है।” सब लोग एकाएक चौक गए।

सोनाली ने कहा,-“वो कैसे?”

“पोस्ट मार्टम रिपोर्ट में लिखा है जो साइनाइड की बोतल हमें सुबोध की लाश के पास से बरामद हुई थी, उसी साइनाइड से सुबोध ठाकुर की हत्या हुई है। और जो दस्ताने हमें पाए गए हैं उस दस्ताने के अंदर वाले हिस्से पर रानू की उंगलियों के निशान है। मुझे लगता है कि क्योंकि साइनाइड की बोतल थी इसलिए उसने दस्ताने पहन कर के रात के खाने में साइनाइड मिला दी थी और खाना खाते ही सुबोध ठाकुर की मौत हो गई। इसके बाद उसने सुबोध ठाकुर की लाश को ले जाकर के जमीन के 15 फुट नीचे गाड़ दिया और लाश गाड़ते वक्त ही मुझे लगता है ये एटीएम स्लिप गिर गई होगी जो मुझे कल लान मे मिल गई।और सुबोध की हत्या करीब 7 जून को रात मे 900 बजे हुयी थी।” अविनाश तुरंत ही सोनाली की तरफ मुखातिब हुआ। “क्यों सोनाली रानू से तो तुम्हारे नाजायज तालुकात थे। वैसे तो तुम्हारे बहुत लोगों से नाजायज तालुकात हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि सुबोध की हत्या में तुम्हारा हाथ है।”

तब तक सोनाली बोल पड़ी,-“ लेकिन सुबोध को मार करके मुझे क्या मिलेगा ? मैं तो खुद चाहती थी कि सुबोध अपनी पत्नी को तलाक दे और मुझसे शादी कर ले।”

“कहीं ऐसा तो नहीं कि सुबोध को रानू और आपके नाजायज संबंधों के बारे में पता लग गया होगा इसलिए डर के मारे सबसे पहले आपने रानू से मिलकर के उसका खून करवा दिया।”तब तक वह तुरंत रीमा की तरफ मुडा।

“रीमा, शर्म आनी चाहिए आपको। आपके पिछले 1 साल से रानू के साथ नाजायज संबंध थे और आप होटल में उसके साथ रंगरेलियां मनाने जाती थी।”

 रीमा ने कहा,-“ मैं मानती हूं कि मेरे रानू से नाजायज संबंध थे। इसके बारे में मैं पहले भी आपको बता चुकी हूं और जब पिछले साल गर्मी की छुट्टियों में मैं फार्महाउस आई थी उसी वक्त मैं और रानू काफी करीब आ चुके थे। सुबोध तो मुझे कभी वक्त देता नहीं था। अब आप ही बताइए ऐसे हालात में मैंने क्या गलत किया?”अविनाश सुशांत ठाकुर की तरफ मुखातिब हुआ।

“क्यों सुशांत जी आप तो रानू से बहुत छुप छुप के मिलते थे। यह बात हमें साहिल से पता लगी है।”

साहिल बोला,-“ सर मुझे यह नहीं पता है कि इन लोगों के बीच क्या बातें होती थी?पर मैं अक्सर सुशांत जी को रानू से अकेले में मिलते देखता था।”

अविनाश ने कहा,-“ सुशांत जी आप रानू से अकेले में क्यों मिलते थे?”

सुशांत बोला,-“बात दरअसल यह है कि मैं भी सोनाली को चाहता हूं। पर सोनाली सुबोध को पसंद करती थी। मैं रानू से सोनाली और सुबोध के संबंध के बारे में पूछा करता था। मुझे लगता था कि यदि किसी तरीके से सुबोध और सोनाली का ब्रेकअप हो जाए तो मैं सोनाली से शादी करूं लूँ। शायद यही समझाने के लिए मैं रीमा से मिलने मुंबई अक्सर जाया करता था की वो अपने रिश्ते सुबोध से सुधार ले।इसी सिलसिले में मैं करीब 1 महीने पहले भी उसके घर गया था।”

“लेकिन सुशांत जी मुझे तो यही लग रहा है कि मर्डर में आप ही का हाथ है।”

“पर आपको ऐसा क्यों लग रहा है ?”

“जब भी मेरा ध्यान साइनाइड की बोतल पर जा रहा है तो मुझे लग रहा है कि इसमें आपका ही का हाथ है क्योंकि केमिकल का धंधा आप ही करते हैं। आप के पास साइनाइड आसानी से मिल सकता है। अन्यथा साइनाइड किसी को इतनी आसानी से नहीं मिलती है।”

सुशांत बोला,-“यह बात सही है कि मैं केमिकल का धंधा करता हूं लेकिन मैंने रानू को यह बोतल नहीं दी है।”

“तो फिर रानू को यह बोतल किसने दी है। सोनाली भी तो ब्यूटी पार्लर चलाती है। हो सकता है इसे कहीं से साइनाइड मिल गया हो।”

मनोज बोलता है,-“अविनाश तुम ये पहेलियां ना बुझाओ। यह बताओ कि इन सब में किसका हाथ है ?”

अविनाश कहता है,-“साहिल तुम इसके बारे में कुछ रोशनी डाल सकते हो।” साहिल सब पका गया।

“नहीं सर मुझे कुछ नहीं पता है।”

“लेकिन मुझे सब कुछ पता है। सुबोध का मर्डर करवाया है उसकी बीवी रीमा ने।”

तब तक रीमा जोर से चिल्लाने लगी,- “आपके पास क्या सबूत है कि मैने ही सुबोध का मर्डर करवाया है।”

अविनाश ने कहा,-“फिंगर प्रिंट रिपोर्ट कहती है कि इस साइनाइड की बोतल पर आपकी उंगलियों के निशान हैं।”

“मैं कहती हूं यह निशान मेरे उंगलियों के हो ही नहीं सकते।”

अविनाश रीमा को रिपोर्ट खोल करके दिखा देता है।अब आप हमें यह बताइए कि साइनाइड की बोतल पर आपकी उंगलियों के निशान कैसे आए।”

रीमा गुस्से मे बोलती है,-“मुझे कुछ नहीं पता है कि यह निशान कैसे आए?”

अविनाश कहता है,-“मैं बताता हूँ ये निशान कैसे आए है ? सुशांत एक महीने पहले आपके घर मुंबई गए थे। आपने उनके सामान से साइनाइड की बोतल चुरा ली थी। उसी दौरान साइनाइड की बोतल पर आपकी उंगलियों के निशान आ गये। डर के मारे रानू ने साइनाइड की बोतल को दस्ताने पहनकर प्रयोग किया क्योंकि उसको डर था कि कहीं साइनाइड उसके शरीर से लग जाएगा तो उसको कहीं हानि ना पहुंचा दे। इसी वजह से दस्ताने पहनकर प्रयोग करने के चक्कर में आप के निशान साइनाइड की बोतल पर पड़े ही रह गए और दस्तानों के अंदर वाले हिस्से पर रानू की उंगलियों के निशान रह गए। 7 जून की रात को उसने आपके कहे अनुसार सुबोध के खाने में साइनाइड मिला दिया। खाना खाते ही तुरंत सुबोध ठाकुर की मौत हो गई। उसने सुबोध ठाकुर की लाश को ले जाकर के 15 फीट नीचे गाड़ दिया।”

“लेकिन उससे दो गलतियां हो गई। पहली यह कि उसने दस्ताना और बोतल दोनों ही लाश के साथ गाड़ दिया और दूसरी गलती यह हुई कि सुबोध ठाकुर के घर की चाबी उसके जेब में ही पड़ी रहने दी। हो सकता है उसको इसका ध्यान न आया हो। इसके बाद आपके कहे प्लान के मुताबिक 7 जून से 11 जून तक लगातार सुबोध के मोबाइल से आपको फोन करता रहा। यह बात आप कबूल चुकी हैं कि आपके पास 7 जून से 11 जून तक लगातार सुबोध के फोन आए हैं। अब आप हमें यह बताइए यदि सुबोध 7 जून को रात 9 बजे मर गया था तो उसके मोबाइल से कौन फोन कर रहा था? वह फोन रानू कर रहा था।”

“आप यह जाहिर करना चाहती थी कि सुबोध रानू का मर्डर करके फरार हो गया है। आप सिविल इंजीनियरिंग की हुई है। आपका दिमाग काफी तेज हैं। आपने सुबोध की लाश को 15 फीट नीचे गडवा दिया। उसके बाद 11 तारीख को रात में आ करके आपने रानू की हत्या कर दी।पहले आपने उसे दारू पिलाई फिर तकिया से दबाकर आपने उसकी हत्या कर दी। और ठीक उसी जगह ले जाकर 5 फीट नीचे आपने रानू की लाश को गाड़ दिया। मतलब लाश के नीचे लाश।”“आपको पता था कि जब भी हम स्निफ्फर डाग से फॉर्म हाउस को सर्च करेंगे तो उन्हें रानू की लाश मिल जाएगी। अब दुबारा तो कोई दो चार दिन बाद उस फार्म हाउस की तलाशी लेगा नहीं क्योंकि पुलिस तो पहले ही तलाशी ले चुकी होगी।जब मैंने फार्म हाउस की कल दोबारा तलाशी लिया और मुझे एटीएम स्लिप मिली तब मुझे कुछ-कुछ माजरा समझ में आने लगा। यही कारण है सोनाली जी कि जब आपने 7 जून से 11 जून के बीच सुबोध के मोबाइल पर फोन किया था तो रानू ही आपसे बात कर रहा था क्योंकि सुबोध तो पहले से ही मर चुका था।”

“रीमा जी अब मैं आपको आपकी सबसे बड़ी गलती बताता हूँ। फार्म हाउस की सिर्फ तीन ही चाबी है।जब हम सब पहले दिन फॉर्म हाउस में घुसे थे तो वह फार्म हाउस लॉक पड़ा था। अब आप हमें यह बताइए कि सुबोध की चाबी उसके पैंट मे मिली। एक चाबी रानू के घर पर मौजूद थी। तीसरी चाबी आपने मुझे दे दी थी।जिस रात रानू की हत्या हुई रानू फार्म हाउस की चाबी अपने घर छोड़ आया था। सुबोध की चाबी उसके जेब में पड़ी थी। तो वह फार्म हाउस रानू की हत्या करने के बाद किसने लॉक किया। वह फार्म हाउस आपने लॉक किया था। यही आपकी सबसे बड़ी गलती थी। जब मुझे सुबोध की चाबी उसके जेब से मिली तब मैं कंफर्म हो गया कि हत्या में आपका ही इंवॉल्वमेंट है। अगर आप घर खुला छोड़ देती तो हो सकता था कि यह मर्डर किसी अजनबी पर चला जाता। सुबोध और रानू के मर्डर मे आपका हाथ हैं और हमारे पास पर्याप्त सबूत हैं। अब आप हमें यह बताइए कि रानू ने सुबोध का मर्डर क्यों किया।”

रीमा पसीने-पसीने हो गई। उसने एक गिलास पानी पिया और बोली,-“सुबोध मुझ पर बार-बार यह दबाव बना रहे थे कि मैं उन्हें डिवोर्स दे दूं पर मुझे कुछ भी रकम देने के लिए तैयार नहीं थे। धीरे धीरे मेरी अपनी जिंदगी भी खराब हो रही थी। फिर मुझे अचानक एक प्लान सूझा। 1 साल पहले मैं जब इस फार्म हाउस में सुबोध के साथ रहने आई थी तभी मैंने इस मर्डर की प्लानिंग कर दी थी। मैंने रानू को अपने कब्जे में कर लिया उससे जिस्मानी ताल्लुकात बनाकर। रानू मेरा दीवाना हो गया था। हम होटल में रात गुजरने लगे और मैंने रानू को यह समझा दिया कि सुबोध की हत्या के बाद मैं उससे शादी कर लूंगी। वो मेरे झांसे में आ गया। हमारे बीच एक शर्त थी कि हम मोबाइल से आपस में कभी भी कम्यूनिकेट नहीं करेंगे। जब सुशांत मेरे घर आया तो वहां से मैंने साइनाइड की बोतल निकाल कर के रानू को दे दी। प्लान के मुताबिक 7 जून को रानू ने सुबोध की हत्या करके उसकी लाश को लान मे गाड़ दिया और उसकी हत्या के बाद सुबोध बनकर उसके मोबाइल से मुझे फोन करता रहा। मुझे यह पता था कि रानू मेरे लिए कभी भी खतरा बन सकता है क्योंकि मुझे रानू से शादी करनी ही नहीं थी। मुझे तो अमन से शादी करनी थी। 11 जून की रात रानू को बुलाकर मैंने खूब दारु पिलाई और उसके बाद तकिए से दबा कर के उसका खून कर दिया और उसकी लाश को ले जाकर के उसी जगह पर गाड़ दिया। मुझे यह पूरी उम्मीद थी कि सुबोध की लाश पुलिस कभी भी नहीं ढूंढ पाएगी।”तब तक मनोज बोला,-“ लेकिन रीमा जी यह काम आपके अकेले बस का नहीं है। इसमें जरूर आपके साथ कोई होगा।”

अविनाश बोला,-“मनोज रीमा के बॉयफ्रेंड अमन को जरा ले जाकर थर्ड डिग्री दो तो यह बोलेगा कि यह मर्डर मे शामिल था की नहीं।” अमन का डर के मारे बुरा हाल हो गया।

“मैं सब कबूलने के लिए तैयार हूं। मैंने ही कत्ल में रीमा का साथ दिया था।”

अविनाश बोला,-“मुझे पता था कि वह तुम ही हो मोटर गैराज के मालिक। इसने सुबोध की कार ले जाकर के मोटर गैराज में खोल दी। इसीलिए गाड़ी का अस्तित्व हमें काफी दूर-दूर तक नहीं मिल रहा था।”

बेबी बोली,-“बाप रे बाप ! इतनी भयंकर साजिश चल रही थी। इसका तो हमें अंदाजा भी नहीं था।”

अविनाश बोला,-“जब तक लाश नहीं मिलती है तब तक कातिल को ढूंढ पाना बड़ा मुश्किल होता है। यह बात सही थी कि अगर मैं दोबारा फॉर्म हाउस पर सबूत ढूंढने नहीं गया होता और मुझे एटीएम स्लिप नहीं मिली होती तो मैं भी कभी यह अंदाजा नहीं लगा पाता कि लाश के नीचे लाश गड़ी हो सकती है।”राजू बोला,-“लेकिन सर आपने यह अंदाजा लगाया कि लाश के नीचे लाश हो सकती है। जब राजू की हत्या हुई उसने नाईट ड्रेस पहन रखा था। एटीएम स्लिप नाईट ड्रेस में वह कैसे रखेगा ? लाश को छुपाते वक्त वह एटीएम स्लिप गलती से उसकी जेब से गिर गई होगी। अब कोई अहम चीज गिरी होती तो वह उसको ढूंढने की कोशिश भी करता। इसीलिए मेरा अंदाजा बार-बार यह हो रहा था कि हो ना हो यह लाश छुपाते वक्त ही गिरी होगी। स्निफ्फर डॉग सिर्फ एक ही जगह भौंका था। बस इसी सब से एक अंदाज़ा लगा मैंने।”

“सुशांत जी आपको बहुत मुबारक हो। सुबोध की प्रेमिका और सारी जायदाद के अब आप इकलौते वारिस हैं।”

“सर मैं फिर आपसे सच कह रहा हूं कि मैं सोनाली को जरूर चाहता था लेकिन मैं कभी यह नहीं चाहता था कि सुबोध की मृत्यु हो जाए।”

“आप क्या चाहते थे वह तो अब आप या भगवान ही जानता हैं। फिलहाल अभी सब कुछ आपका है। चलो राजू बेबी हम वापस एजन्सि चलते हैं। बाइ मनोज।”

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