Aakhir kisne uske pati ka murder kia high suspense story

Aakhir kisne uske pati ka murder kia high suspense story
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शांती श्रीवास्तव मिडलक्लास लड़की थी।वो बहुत मेहनत करके एक वकील बनी थी। वो एक क्रिमिनल लॉयर थी। वो एक काबिल वकील थी और अपना हर केस पूरी ईमानदारी के साथ लड़ती थी और किसी भी बेगुनाह को जब तक इंसाफ न मिल जाये तब तक वह उसके लिए लड़ती रहती थी।

शांति देवी अपने किसी भी केस की इन्वेस्टिगेशन अपने एक जासूस से करवाती थी जिसका नाम प्रवीण था।

Aakhir kisne uske pati ka murder kia high suspense story

Aakhir kisne uske pati ka murder kia high suspense story

कोई भी डिफिकल्ट केस हो वो उसको सॉल्व कर ही देता था।

वैसे तो उसकी जिंदगी में उतार चढ़ाव आते जाते रहते थे।लेकिन एक केस ने उनको बहुत परेशान किया।

एक बार उसके पास एक लेडी आयी उसने शांती श्रीवास्तव को कहा कि मेरा नाम रीना है।मेरे पति एक सोशल वर्कर है।

उन पर एक कत्ल का केस हुआ है लेकिन मैं जानती हूं कि वो निर्दोष है।वो कभी भी किसी का कत्ल नही कर सकते।

शांती जी ने कहा हर पत्नी को लगता है कि उसका पति निर्दोष है वो कोई गुनाह नही कर सकता।

तो मैं आपकी बात क्यो मानू की आपका पति निर्दोष है।

तब रीना ने कहा मैं आपकी बात मानती हूं लेकिन जो आदमी आज तक एक मक्खी नही मारा जब उसके हाथ से कोई चींटी भी मर जाती थी।

तब भी उसको बहुत अफसोस होता था।

वो आदमी किसी इंसान को मार सकता है क्या।मैंने आपका नाम सुना था।

कि आप किसी निर्दोष को कभी भी सजा नही होने देती इसलिए मैं आपके पास आई हूं।

चलो ठीक है मैं पहले आपके पति का केस स्टडी करना चाहूंगी।

अब शांती देवी उस आदमी का केस स्टडी करने लगी।

उसकी फ़ाइल के हिसाब से सारे सबूत उसके खिलाफ थे सबूतों के अनुसार उसका पति सुरेश ही कातिल था।

शांती सुरेश से मिलने जेल में गयी और सुरवश को कहा कि तुम्हारी पत्नी मेरे पास आई थी।

मैं तुम्हारा केस लड़ रही हूं सारे सबूत तुम्हारे खिलाफ है और अदालत में केवल सबूत ही चलते है।

तब सुरेश ने भरी हुई आंखों से कहा मैम मेरे पास कोई सबूत या गवाह नही है जिससे मैं ये साबित कर सकूं की मैं बेगुनाह हु।

बस भगवान ही मेरा गवाह है लेकिन वो गवाही देने नही आ सकता।

फिर शान्ति देवी ने  उसको पूछा कि उस दिन क्या हुआ था।मुझको सबकुछ सच सच बताओ।

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सुरेश ने कहा- मैं एक सोशल वर्कर हु और अनाथ बच्चों के उज्वल भविष्य के लिए मैं काम करता हु।दरअसल हम एक केम्पेन चलाते है।

जिसमे हम लोगो को इन अनाथ बच्चों की शिक्षा और उत्थान के हम लोगो को जागरूक करते है और जो भी डोनेशन आता है।

उसको हम इन अनाथ बच्चों की पढ़ाई और उनके रोज के खर्च के लिए यूज करते है।

लेकिन कुछ महीनों से पैसों के हिसाब में कुछ गड़बड़ी हो रही थी।

मैने जब अपने सीनियर से इसके बारे में बात की तो उसने कहा कि ये तुम्हारा काम नही।

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तुम इसमें न पडो तो ही तुम्हारे लिए अच्छा होगा।

दरअसल मुझे साहिल ने इस बारे में मुझे बताया था।

वो ही सारे अकाउंट संभालता है उसको बड़े साहब ने अकाउंट में हेर फेर करने के लिए कहा था।

उसको इस काम के लिए पैसे भी दिए थे।

लेकिन वो उन बच्चों के पैसे से अपना घर नही चलाना चाहता था।

उसने उन लोगो को कहा कि अब मैं ये काम नही करूँगा।

लेकिन उन लोगो ने उसको धमकी दी कि वो लोग उसको जान से मार देंगे।

फिर साहिल ने मुझको बताया इसलिए मैं उनके पास गया था।

अगले दिन मैंने फिर उन लोगो को समझाने की कोशिश की तो उन लोगो ने मुझको भी पैसे से खरीदने की कोशिश की लेकिन मैं नही माना और पुलिस में जाने को कहा।

मैने कहा की अगर उन लोगो ने ये सब बन्द नही किया तो मैं पुलिस स्टेशन में जाकर कम्प्लेंट करूँगा।

फिर मैं अपने घर आ गया अगले दिन जब मैं काम पर गया तो मैं साहिल के कमरे में गया।

मैने देखा कि उसको किसी ने चाकू मार दिया है।जब मैं उसका चाकू निकाल रहा था।

तब हमारा चपरासी वहाँ आ गए और खून खून चिलाने लगा।

और पुलिस को बुलवाकर उनसे कहा कि मैंने साहिल का खून कर दिया है।

अब मेरी जिंदगी आप के हाथ मे है आप ही मुझको बचा सकती हो।

जो सच था वो मैंने आपको बता दिया।

शांति देवी ने कहा कि चलो ठीक है अब आगे मैं सम्भाल लुंगी मैं देखती हूँ मुझसे क्या हो सकता है।

उसके बाद शांति देवी घर आकर सोचने लगी अगर सुरेश ने साहिल का खून नही किया तो किसने किया होगा।

क्या उसके सीनियर ने खून किया है क्योकि उनके पास तो मोटिव भी था साहिल को मारने का।

फिर शांति देवी ने अपने पर्सनल डिटेक्टिव को बुलाया और उनसे इस केस के बारे में डिस्कस किया।उस जासूस जिसका नाम प्रवीण था।

उसने कहा कि अगर सुरेश की नजर से देखें तो ये केस बिल्कुल सिंपल है।

उनके सीनियर ने साहिल को मार है।लेकिन सबूतों और गवाहों के अनुसार ये खून सुरेश ने किया है।

लेकिन सीनियर के खिलाफ कोई सबूत भी नही है जिससे हम उनको गुनहगार बोल सके।

अब हमको पहले ये कन्फर्म करना होगा कि सुरेश सच बोल रहा है के झूठ तो सबसे पहले हमको उनके अकाउंट्स चेक करने होंगे।

अब प्रवीण ने अपनी इन्वेस्टिगेशन शुरू करदी।

एक हफ्ते बाद उसने अपनी सारी इन्वेस्टिगेशन एक फ़ाइल में देकर शांति देवी को बताया कि असली कातिल कोन है।

उसने बताया कि उसने अपनी इन्वेस्टिगेशन की शुरुआत सीनियर से और पूछताछ और अकाउंट की जांच के बाद पता चला कि सुरेश सच बोल रहा था।

उन लोगो ने पैसों का हेर फेर तो किया था।

और उनको साहिल और सुरेश दोनो ने हि ये सब काम ना करने के लिए कहा था।

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सुरेश ने पुलिस की धमकी भी दी थी और उन लोगो ने सुरेश को मारने के लिए किसी को सुपारी भी दी थी।

लेकिन अगले दिन साहिल के खून के इल्जाम में सुरेश को पकड़ लिया गया ।

इसलिए उन लोगो ने सुरेश को मारना कैंसल कर दिया।

फिर मैंने वहाँ के चपरासी से पूछताछ की तो मुझको पता चला कि उस दिन साहिल की मृत्यु से पहले तीन लोग साहिल के कमरे में गये थे।

सबसे पहले सन्तोष नाम का एक लड़का दूसरा रेखा नाम की लड़की और तीसरा सुरेश।

फिर मैंने अपनी इन्वेस्टिगेशन वहां से शुरू की पहले मैं चपरासी से पूछा कि क्या वो उन दोनों को जानता है तो उसने कहा कि वो सन्तोष नाम का लड़का तो पहली बार ही आया था।

लेकिन रेखा जी तो बहुत बार आती थी।

वो साहिल जी को प्यार करती थी लेकिन साहिल जी उनसे कहते थे कि मेरी शादी हो चुकी है।

लेकिन फिर भी वो साहिल जी के पीछे पड़ी रहती थी और उनसे कहती थी कि तुम अपनी पत्नी को तलाक दे दो फिर हम दोनों शादी कर लेंगे।

पर साहिल जी ने उनको हर बार मना कर दिया।

उनके मरने के एक दिन पहले उन दोनों में झगड़ा भी हुआ था।रेखा जी उनको धमकी देकर गयी थी ।

कि अगर साहिल उसका नही हुआ तो किसी का नही हो सकता और गुस्से से वहां से चली गयी।

अब मैने रेखा के घर जाकर पूछताछ करने का सोचा तो पता चला कि उसने आत्महत्या कर ली है और एक चिठी लिख कर गयी है।

जिसमे उसने लिखा कि मेरे साहिल का किसी ने खून कर दिया है।

अब मैं भी जीकर क्या करूंगी इसलिए मैं आत्महत्या कर रही हु मेरी मृत्यु का कोई जिम्मेदार नही है।

इसलिये वो भी कातिल नही हो सकती अब वो केस फिर से वहीं आ गया कि आखिर कातिल कौन है।

फिर मैंने उस चपरासी से फिर पूछताछ की और पूछा क्या तुम उस लड़के क्या नाम है उसका हां सन्तोष।

क्या तुम सन्तोष के बारे में कुछ जानते हो कि वो कहाँ रहता है।

या फिर वो साहिल से क्यो मिलने आया था।

चपरासी ने कहा कि मैं उसको नही जानता वो पहली बार ही साहिल जी के पास आया था।

अब मेरी सारी मेहनत पर पानी सा फिर गया मैं ये सोच रहा था।

फिर मैंने साहिल के आस पड़ोस वालो से संतोष के बारे में पूछा लेकिन कोई भी उसको नही जानता था।

लेकिन उन्होंने बताया कि एक आदमी साहिल के जाने के बाद आया करता था।

अब उसका नाम तो हमे मालूम नही फिर वहाँ के एक पान वाले से जब मैंने पूछा तो उसने बताया कि हाँ मैं उसको जानता हूं उसका नाम संतोष है।

साहिल की पत्नी और सन्तोष के बीच चक्कर चल रहा था।वो जब मेरी दुकान पर पान खाने आता था।

तब उसने बताया था कि वो साहिल की पत्नी से प्यार करता है।

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मैने उसको कहा कि वो तो साहिल की पत्नी है।ये तो गलत है।

तब उसने कहा कि साहिल उसको खुश नही रखता।वो मेरे साथ ही खुश रहती है ।

वो उसकी ख्वाहिश पूरी नही कर पाता मैं उसकी सारी ख्वाहिश को पूरी करता हूँ।

मैं कोई तरीका निकाल लूंगा जिससे हम दोनों साथ रह सकें।

क्या तुमको पता है कि वो कहाँ रहता है।

हाँ वो यहीं पास में रहता है और उसने मुझे उसका पता बताया।

मैं उसके घर गया तो पता चला कि वो बाहर गया है।

वहीं पास में एक चाकू बेचने वाला था।।

उसके पास उसी डिजाइन का चाकू था जिससे साहिल का खून हुआ था।मुझे थोड़ा शक हुआ।

मैने उस चाकू वाले से पूछा कि क्या तुम सामने के घर में रहने वाले आदमी को जानते हो।

उसने कहा हां उस घर मे सन्तोष जी रहते है।।

क्या वो चाकू तुमसे ही खरीदते है हाँ कल ही उन्होंने मुझसे एक चाकू खरीदा है।

क्या ये वाला चाकू ही खरीदा था।

हाँ साहब क्या ऐसे डिजाइन के चाकू कहीं और मुझको मिल सकते है।

तब उसने कहा कि ये चाकू मैं अपने घर मे ही डिजाइन करता हूँ।इन डिजाइन के चाकू आपको मुश्किल से ही मिलेंगे।

अब मेरा शक यकीन में बदल गया कि सन्तोष ने ही साहिल का कत्ल किया है।

और पुलिस को इस बारे में बताया पुलिस ने सन्तोष को पकड़ लिया।

फिर पुलिस की सख्ती से पूछताछ करने पर उसने बताया कि हां मैने ही साहिल को मारा है ।

मैं और साहिल की पत्नी एक दूसरे से प्यार करते है।

इसलिए मैंने उसको अपने रास्ते से हटाने के लिए उसको चाकू मार कर अपने रास्ते से हटा दिया।

लेकिन अगले दिन जब मैंने पोस्टमार्टम रिपोर्ट पढ़ी तो पता चला कि साहिल की मौत चाकू मारने से नही हुई बल्कि जहर से हुई है।

अब ये मामला फिर वहीं आ गया लेकिन तभी मेरा दिमाग की बति जली और मैने साहिल के टिफिन की जांच करवाई।

फिर पता चला कि उसके खाने में जहर मिलाया गया है।

अब कातिल हमारे सामने था और उसके पास साहिल को मारने का मोटिव भी था।

उसकी पत्नी सन्तोष से प्यार करती थी और अपने पति को वो भी अपने रास्ते हटाना चाहती थी।

अब उसकी पत्नी को भी गिरफ्तार कर लिया गया।

कड़ी पूछताछ के बाद उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया।

फिर शांति देवी ने सारे सबूतों को अदालत में दिया और फिर सुरेश को बाइज्जत रिहा कर दिया गया।

सुरेश की पत्नी ने शांति देवी का शुक्रिया अदा किया।

शांति देवी ने कहा कि इसमें मैंने कुछ नही किया तुम्हारा पति निर्दोष था इसलिए मैंने उसकी मदद की।

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